बिजनौर, जेएनएन। नूरपुर से दस किलोमीटर दूर स्थित हीमपुर पृथ्या गांव शिक्षक चंचल कटारिया शिक्षा के साथ पर्यावरण का भी उजियारा फैला रहे हैं। बच्चों को पढ़ाने के साथ ये पिछले दस वर्षों से पर्यावरण संरक्षण के लिए भी कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही वह लोगों को एक पौधा अवश्य लगाने के लिए प्रेरित करते हैं।

चंचल के घर के बगीचे में आयुर्वेदिक व फलदार पौधे हैं। कुछ पौधे सुगंध फूलों वाले भी हैं। लाकडाउन में इन्होंने आस पड़ोस व घर में आने वाले लोगों को तुलसी, गिलोय, लेबन ग्रास, तेज पत्ता का काढ़ा पिलाया। औषधीय पौधारोपण में शिक्षक की पत्नी रीता गुर्जर पूरा सहयोग करती हैं। चंचल ने बताया कि पेड़ पौधों का पालन पोषण वह अपने बच्चों की तरह करते हैं। घर में तुलसी, नीम, पत्थर चट्टा, गिलोय, हार सिगार, चंपा, गुलाब, कड़ी पत्ता, कागजी नींबू, जामिर, अनार, किन्नू व आवला समेत अनेक पौधे लगाए हुए हैं। सजावटी पौधों में बोगनविलिया, क्रिसमस ट्री, मधु मालवती, शतावरी सदाबहार हैं। कोरोना महामारी ने लोगों को समझा भी दिया है कि औषधीय पौधों का इंसान के जीवन में कितना महत्व है। सुबह व शाम देखभाल

सुबह के समय ड्यूटी पर जाने से पहले व शाम को आने के बाद दो घंटे देखभाल पौधों की करते हैं। सुबह व शाम पौधों को पानी देते हैं। शिक्षा से बचा समय पौधों पर भी व्यतीत होता है। जन्मदिन से मुंह दिखाई की रस्म में भेंट करते हैं पौधे

चंचल कटारिया अपने शुभचिंतकों व परिचितों को जन्मदिन पर कोई गिफ्ट न देकर पेड़ पौधे ही भेंट करते हैं। दुल्हन को मुंह दिखाई की रस्म में भी पौधे भेंट करते हैं।

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