कहां तक बहे, कितने बड़े हुए? UP में घड़ियालों का सच जानने गंगा में उतरेंगी वन विभाग और WWF की टीमें
Gharial conservation: वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ गंगा में छोड़े गए घड़ियालों का सर्वेक्षण करेंगे, जिससे उनकी वृद्धि, बहाव और प्रजनन क्षमता का पता चल सके।

गंगा की धारा के बीच में बने टापू पर धूप सेंकता घड़ियाल। सौ. वन विभाग
HighLights
वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ गंगा के घड़ियालों का सर्वेक्षण करेंगे।
सर्वे में घड़ियालों की वृद्धि, बहाव और प्रजनन का आकलन होगा।
बिजनौर से नरौरा बैराज तक चलेगा यह महत्वपूर्ण अभियान।
अजीत चौधरी, बिजनौर। वन विभाग और वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फाउंडेशन (WWF) द्वारा गंगा में छोड़े गए घड़ियालों का सर्वे किया जाएगा। देखा जाएगा कि गंगा में छोड़े गए घड़ियाल कितने बड़े हो गए हैं। वे धारा के साथ कहां तक बह गए हैं। वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ द्वारा जल्दी ही इसका सर्वे किया जाएगा। सर्वे से पता चल सकेगा कि वे कितने समय में प्रजनन शुरू कर सकते हैं।
जलीय जीवों से ही नदियों में जीवन का संचार होता है। जिले में गंगा की धारा में मगरमच्छ, घड़ियाल, डाल्फिन, कछुओं आदि मिलती हैं। गंगा बैराज के पास बने टापुओं पर घड़ियाल अक्सर धूप में आराम करते हुए दिख जाते हैं। साथ ही यहां डाल्फिन भी अठखेलियां करते हुए दिखती हैं।
कभी गंगा में घड़ियाल विलुप्ति के कगार पर पहुंच गए थे। घड़ियालों का कुनबा बढ़ाने के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने वर्ष 2009 में गंगा में घड़ियाल के बच्चे छोड़ने की शुरूआत की गई थी। अब तक घड़िलयों ने गंगा में प्रजनन शुरू नहीं किया है। कुछ दिन पहले प्रयागराज में गंगा में घड़ियालों देखे गए थे।
माना गया था कि घड़ियाल चंबल से यमुना में बहकर वहां तक पहुंच गए। अब देखा जाएगा कि गंगा में मुजफ्फरनगर, मेरठ में छोड़े गए घड़ियाल कहां तक पहुंचे हैं। इसके लिए सर्वे किया जाएगा। बिजनौर के गंगा बैराज से नरौरा बैराज बुलंदशहर तक सर्वे होगा। वर्ष 2022 में हुए सर्वे में 80 घड़ियाल दिखे थे।
इतने छोड़े गए घड़ियाल
गंगा में छोड़े गए घड़ियाल हैचरी में पैदा हुए थे। वर्ष 2019 में भी मुजफ्फरनगर की ओर 60 घड़ियाल छोड़े गए। इनमें 50 मादा और दस नर थे। दो वर्ष पहले भी मेरठ में 75 घड़ियाल छोड़े गए हैं। इनमें 58 मादा और 17 नर हैं। घड़ियाल और मगरमच्छ में आकार में अंतर होता है।
घड़ियाल और मगरमच्छ में होता है अंतर
घड़ियाल और मगरमच्छ में अंतर होता है। घड़ियाल का मुंह चपटा और लंबा होता है। उनके मुंह पर घड़े के आकार का गोला सा बना होता है, इसलिए इन्हें घड़ियाल कहा जाता है। यह शर्मीले होते हैं और मनुष्यों पर हमला नहीं करते हैं। ये छोटी मछलियों को खाते हैं और उथले पानी में रहना पसंद करते हैं। ये पांच मीटर तक लंबे हो जाते हैं।
गंगा में बैराज के पुल के पास बने टापू पर भी घड़ियाल दिख जाते हैं। घड़ियालों के सर्वे के लिए अभियान चलाया जाएगा। देखा जाएगा कि कहां कितने घड़ियाल हो गए हैं। उनके स्वास्थ्य, लंबाई आदि का रिकार्ड भी बनाया जाएगा।
-जय सिंह कुशवाहा, डीएफओ
