जेएनएन, बिजनौर। पहाड़ों में लगातार हो रही भारी बारिश की वजह से रामगंगा बांध की झील के कैचमेंट एरिया में जलभराव हो गया है। बांध प्रशासन ने इस स्थिति से निपटने के लिए मंगलवार को देर शाम पांच हजार क्यूसेक पानी छोड़ दिया। रामगंगा बांध के अधिशासी अभियंता ने बिजनौर समेत सात जिलों के डीएम को भेजे चेतावनी पत्र में रामगंगा क्षेत्र में लोगों को अलर्ट करने के लिए कहा है।

पहाड़ों में हो रही झमाझम बारिश की वजह से मंगलवार दोपहर रामगंगा बांध की झील का जलस्तर 363.200 मीटर हो गया। बांध के कैचमेंट एरिया नौला, चौखुटिया, मारचुला, रानीखेत ओर लैंसडाउन में भी जबरदस्त बारिश हुई। रामगंगा बांध प्रशासन ने झील में पानी की आमद को देखते हुए बांध के स्पिलवे गेटों को उठाकर पानी छोड़ना शुरू कर दिया है। पहले चरण में बांध से पांच हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। बांध प्रशासन ने पानी की आमद के हिसाब से पानी की निकासी बढ़ाए जाने के संकेत भी दिए हैं। पानी छोड़े जाने से पहले रामगंगा बांध के अधिशासी अभियंता नीरज त्यागी की ओर से बिजनौर, मुरादाबाद, अमरोहा रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर ओर फर्रुखाबाद के डीएम एवं एसपी को संभावित बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है। चेतावनी पत्र में कहा है गया कि संबंधित जिलों के डीएम अपने-अपने जिलों में रामगंगा नदी किनारे लोगों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दें। 12 साल पहले पानी ने मचाई थी तबाही

कालागढ़ बांध से सितंबर 2010 में करीब दो लाख क्यूसेक पानी रामगंगा नदी में छोड़ दिया गया था। उस वक्त रामगंगा ने बिजनौर और मुरादाबाद समेत नदी के दोनों ओर बसे इलाकों में जबरदस्त तबाही मचाई थी। उस मंजर को याद कर लोग आज भी सिहर उठते हैं। बताते हैं कि मंगलवार सुबह 11.30 बजे पावर हाउस की टरबाइन मशीन ने बिजली बनाना बंद कर दिया है। अधिशासी अभियंता नीरज त्यागी ने बताया कि सेंट्रल वाटर कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। अगले एक-दो दिन में अभी और जलस्तर बढ़ने की संभावना है। बांध में पानी की आमद को देखते हुए रात्रि में किसी भी वक्त बांध से रामगंगा नदी में पानी डिस्चार्ज किया जा सकता है।

Edited By: Jagran