बिजनौर : मोहित पेट्रो केमिकल में एक ओर मौत का मंजर था और दूसरी तरफ अफसर पूरी तरह बेबस। हादसे के बाद मृतकों और घायलों को तो जिला अस्पताल भेज दिया गया लेकिन लापता अभयराम की तलाश का कोई जरिया नहीं था। फटे टैंक के पास शीरे के एक टैंक के अलावा दो बड़ी हौज भी हैं। इनमें भी शीरा भरा हुआ था। शीरे के टैंक या हौज में अभयराम के होने की आशंका जाहिर की गई। स्थानीय लोगों और अन्य कर्मचारियों ने सरिए के सहारे उसकी तलाश की। आसपास के खेतों में भी तलाशा गया। इसके बाद यह मान लिया गया कि अभयराम टैंक में गिरा है। इस टैंक को खाली करने की कोई तकनीक नहीं थी। डीएम और एसपी बार-बार विशेषज्ञ को बुलाने के लिए कहते रहे, लेकिन आया कोई नहीं। बाद में कुछ कर्मचारियों ने वाल्व खोलकर लिक्विड निकालना शुरू किया। इसके साथ ही गैस वातावरण में फैलने लगी तो इसे तत्काल बंद किया गया। लगाए गए पालिका के टैंकर

टैंक खाली कराने का कोई विकल्प नहीं होने पर प्रशासन ने नगर पालिका के टैंकर मंगवाकर लगवाए। इन टैंकर में लिक्विड भरवाकर दूसरे फैक्ट्री के टैंक में डलवाया गया। दोपहर बाद यह काम शुरू हुआ। इसी बीच ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि इस तरह तो महीनों तक भी टैंक खाली नहीं होगा। ग्रामीणों ने जाम लगा दिया, काफी मशक्कत के बाद जाम खुलवाया गया।

Posted By: Jagran