बिजनौर : मोहित पेट्रो केमिकल लिमिटेड में हुआ हादसा यदि नौ बजे हुआ तो होता तो परिणाम और भी भयंकर होते। फैक्ट्री में कर्मचारियों की ड्यूटी नौ बजे से शुरू होती है लेकिन उन्हें टैंक पर वे¨ल्डग कराने के लिए छह बजे ही बुला लिया गया था। फैक्ट्री में मौजूद अन्य कर्मचारियों ने बताया कि नौ बजे काम पर और भी कई कर्मचारी लगाए जाते। यदि उस समय यह हादसा होता तो और भी कई जानें जाती। कर्मचारियों ने बताया कि हादसे में मारे गए और घायल हुए कर्मचारियों को सुबह नौ बजे फैक्ट्री में आना था लेकिन उन्हें फोन करके छह बजे ही बुलवाया गया था।

चार साल पहले रिजेक्ट कर दिया गया था टैंक

हादसे में मारे गए लोगों को जान बूझकर मौत के मुंह में झोंका गया है। फैक्ट्री में मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि जिस टैंक में ब्लास्ट हुआ है इसे चार साल पहले तकनीकी विशेषज्ञों ने रिजेक्ट घोषित कर दिया था। इसके बावजूद टैंक का इस्तेमाल हो रहा था। इसीलिए इसमें लीकेज हो रहा था। फैक्ट्री प्रबंधन टैंक को बदलवाने के बजाय इस पर वे¨ल्डग करा रहा था। जानकारों का कहना है कि गैस के लिए वे¨ल्डग वाले टैंक का इस्तेमाल नहीं होता। टैंक की छत ढलान वाली होनी चाहिए यह पूरी चादर की बनी होती है।

Posted By: Jagran