बिजनौर: गंगा बैराज पर फिर लौटी डाल्फिन, उथली धारा होने पर चली गई थी दूर
बिजनौर गंगा बैराज पर पानी का स्तर बढ़ने के बाद डाल्फिन फिर से दिखने लगी हैं, जिससे पर्यटक जल सफारी का आनंद ले रहे हैं।

HighLights
गंगा में मिलती हैं गंगेज डाल्फिन, जल सफारी करते हैं पर्यटक।
डाल्फिन संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
जागरण संवाददाता, बिजनौर। गंगा में पानी बढ़ने पर डाल्फिन ने फिर से गंगा बैराज तक पर्यटकों को रिझाना शुरू कर दिया है। इससे पहले धारा उथली होने पर डाल्फिन महीनों से नहीं दिखी थी।
गंगा में पानी भी काफी समय से चल रहा है लेकिन डाल्फिन दो चार दिन से ही दिखनी शुरू हुई है। गंगा में डाल्फिन को देखने और नदी की सैर करने के लिए लोग यहां जल सफारी करने आते हैं।
नदियों में जलीय जीवों के रूप में जीवन बहता है। गंगा में भी जलीय जीवों की भरमार है। यहां मगरमच्छ, घड़ियाल और डाल्फिन भी हैं। डाल्फिन के संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा मेरी गंगा मेरी सूंस अभियान भी चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत बिजनौर में गंगा बैराज से डाल्फिन की गणना शुरू की जाती है जो नरौरा बैराज बुलंदशहर तक चलती है।
गंगा बैराज में पर्यटकों के लिए प्रशासन द्वार जल सफारी कराई जाती है। जून तक गंगा में पानी बहुत कम रह गया था। दो हजार क्यूसेक तक पानी बहता था। गंगा में बैराज के पास भी सिल्ट के टापू ही दिख रहे थे। तब डाल्फिन यहां दिखनी बंद हो गई थी। डाल्फिन आगे गहरी धारा में चली गई थी।
गंगा जुलाई में पानी से लबालब भरकर बहने लगी थी लेकिन तब भी डाल्फिन नहीं दिखीं। अब बैराज के पास कुछ दिन से डाल्फिन फिर से दिखने लगी हैं। गंगा में मिलने वाली डाल्फिन अंधी होती हैं। ये अपने शरीर से निकलने वाली तरंगों के माध्मय से शिकार करती हैं।
तब भी तट से दूर चली गईं थीं डाल्फिन
गंगा में शासन द्वारा चार मोटर बोट का संचालन कुछ समय पहले शुरू किया गया था। उनमें मोटर लगी थी और वे डीजल से चलती थीं। गंगा के पानी में तेल जाने और मोटर चलने से होने वाली आवाज और कंपन से तब डाल्फिन तट से दूर चली गईं थीं। इसके बाद प्रशासन ने मोटर हटाकर इलेक्ट्रिक इंजन लगाया। इससे शोर, पानी में कंपन बंद हुई और तेल भी पानी में जाना बंद हो गया। ऐसा करने पर डाल्फिन फिर से गंगा के पास आ गईं थीं।
इन्होंने कहा
गंगा बैराज के पास डाल्फिन दिख रही हैं। लोग जल सफारी करने के साथ ही डाल्फिन को देखने का आनंद ले रहे हैं। डाल्फिन के संरक्षण के लिए लगातार काम किया जा रहा है।
-जय सिंह कुशवाहा, डीएफओ
