UP के कस्बे की रामलीला हुई ग्लोबल! YouTube पर LIVE दिखा रहे बंटी; सात समंदर पार गूंज रहे जय श्रीराम के जयकारे
Bijnor News: बंटी प्रजापति बिजनौर के बढ़ापुर में श्री शिव चुन्नीवाला मंदिर की रामलीला का पिछले पांच साल से यूट्यूब, ...और पढ़ें

HighLights
बंटी प्रजापति बिजनौर के बढ़ापुर की रामलीला का लाइव प्रसारण दिखा रहे।
देश-विदेश में दर्शकों को रामलीला से जोड़ रहे हैं।
संवाद सूत्र, बढ़ापुर (बिजनौर)। श्री शिव चुन्नीवाला मंदिर परिसर में रामलीला मैदान में आदर्श रामलीला कमेटी के तत्वावधान में चल रहे रामलीला मंचन को कस्बा निवासी बंटी प्रजापति यूट्यूब पर लाइव प्रसारण के माध्यम से देश-विदेश में रामलीला का मंचन दिखा है।
शारदीय नवरात्रों में कस्बे में दो अलग-अलग स्थानों पर रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। श्री शिव बड़ा मंदिर में रामायण वीडियो प्रोजेक्टर पर प्रदर्शित की जा रही है। वहीं श्री शिव चुन्नीवाला मंदिर के रामलीला मैदान में 1955 से आदर्श रामलीला के तत्वावधान में मंचन किया जा रहा है।
प्रत्येक वर्ष की भांति इस साल भी आदर्श रामलीला कमेटी के कलाकारों द्वारा मंच पर भगवान श्रीराम की लीलाओं का शानदार गुणगान किया जा रहा है। वहीं कस्बा निवासी बंटी प्रजापति पिछले पांच साल से अपने यूट्यूब चैनल, फेसबुक, इंस्टाग्राम पेज के माध्यम से बढ़ापुर क्षेत्रवासियों के साथ-साथ दूरदराज रहने वाले दर्शकों व विदेश में रहने वाले भारतीयों को भी मंचन को लाइव दिखा रहे है।
बंटी प्रजापति ने बताया कि उनके द्वारा रामलीला के लाइव प्रोग्राम करने पर देश-विदेश अमेरिका, कनाडा, नेपाल, सऊदी अरब व दुबई में रह रहे उनके दोस्त और दर्शकों का भरपूर प्यार और समर्थन मिल रहा है।
16 वर्षों से रावण के किरदार को जीवंत कर रहे योगेश

ऊमरी (धामपुर) : गांव मोरना स्थित देवता रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित रामलीला ब्रिटिश कालीन रामलीला है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1936 में हुई थी। आज भी गांव निवासी इस धरोहार को संजाऐ हैं। मोरना निवासी 45 वर्षीय योगेश कुमार पिछले 16 वर्षों से लगातार रावण का अभिनय कर रहे हैं। उनका आकर्षक अभिनय व रौबदार मूंछें रावण के किरदार को जीवंत कर देते हैं।
वह हर वर्ष रामलीला से एक माह पहले से ही अभिनय और डायलाग याद करने की तैयारी शुरू कर देते हैं। रोजाना रावण का मेकअप करवाने में करीब एक घंटा लगता है। योगेश कुमार इस अभिनय को करते हुए आत्मविश्वास से मंच पर जाते हैं। वह कहते हैं कि रावण विद्वान पंडित था, लेकिन उसके अहंकार और असत्य का साथ देने के चलते उसे आज खलनायक के रूप में जाना जाता है।
