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यूपी में 21.5 करोड़ का मुआवजा घोटाला टला, हाईवे के लिए अधिग्रहित जमीन कागजों में निकली 'रेगिस्तान'

Published: Fri, 14 Aug 2026 10:50 AM (IST)

मेरठ-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग-119 के लिए अधिग्रहित भूमि 1359 फसली में रेगिस्तान में दर्ज मिली, जिसके बाद विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी ...और पढ़ें

यूपी में 21.5 करोड़ का मुआवजा घोटाला टला।

यूपी में 21.5 करोड़ का मुआवजा घोटाला टला।

HighLights

  1. मेरठ-पौड़ी NH-119 के लिए भूमि अधिग्रहण में अनियमितता।

  2. अधिग्रहित जमीन 1359 फसली में रेगिस्तान में दर्ज मिली।

  3. 21.5 करोड़ रुपये का मुआवजा NHAI को वापस किया गया।

जागरण संवाददाता, बिजनौर। मेरठ-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग-119 के लिए अधिग्रहण की गई भूमि की 1359 फसली से जांच हुई तो उक्त भूमि के कई हिस्से रेगिस्तान में दर्ज मिली।

मामला पकड़ में अपने पर विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी (एसएलओ) ने मुआवजे के लिए करीब 21.5 करोड़ की धनराशि राष्ट्रीय राजमार्ग अथारिटी आफ इंडिया को वापस कर दी। फिलहाल अधिग्रहण की भूमि के मुआवजा वितरण का काम अटका हुआ है।

राष्ट्रीय राजमार्ग अथारिटी आफ इंडिया ने मेरठ-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग-119 के निर्माण को बिजनौर-बैराज मार्ग पर नवलपुर और खेड़की हेमराज गांव की क्रमश: 9.695 हेक्टेयर एवं 6.120 हेक्क्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया था।

इस भूमि के मुआवजा वितरण से पहले किसी व्यक्ति ने तत्कालीन डीएम अंकित अग्रवाल से शिकायत की। शिकायत में कहा गया कि कुछ माफिया ने गांव नवलपुर और खेड़की हेमराज की सरकारी भूमि को अपनी बताकर मुआवजा लेने का प्रयास किया जा रहा।

तत्कालीन डीएम के आदेश पर इन दोनों गांवों में अधिग्रहण की गई जमीनों की जांच की गई, तो पता चला कि 1359 फसली में गांव नवलपुर और खेड़की हेमराज की भूमि राजस्व रिकार्ड में रेगिस्तान में दर्ज है। सहायक अभिलेख अधिकारी ने सुनवाई के बाद उक्त भूमि को मूल श्रेणी में दर्ज किए जाने के आदेश दिए है और वर्तमान में उक्त भूमि मूल श्रेणी में दर्ज भी हो गई।

यह मामला संज्ञान में आने के बाद विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी वंदना कुशवाह ने मुआवजे के भुगतान काे मिली 21.5 करोड़ रुपये की धनराशि एनएचएआई को वापस कर दी। फिलहाल अधिग्रहण की भूमि के मुआवजा वितरण का काम अटका हुआ है।

सहायक अभिलेच अधिकारी के न्यायालय में लंबित है दाे वाद

बिजनौर-बैराज मार्ग पर स्थित गांव नवलपुर के दर्ज गाटा संख्या 10/12 रकबई 17 बीघा, 10/11 मिलजुमला 12 बीघा और 10/03 में दर्ज भूमि में 1359 में रेगिस्तान में दर्ज है और तीनों मामले सहायक अभिलेख अधिकारी के न्यायालय में लंबित है। सहायक अभिलेख अधिकारी ने सुनवाई के बाद गाटा संख्या 10/12 रकबई 17 बीघा भूमि को रिकार्ड में रेगिस्तान की भूमि दर्ज करने के आदेश दिए है।

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