विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

ट्यूब बनी नाव: पुल नहीं होने के कारण जान हथेली पर रखकर नदी पार कर रहे किसान

By Rahul Shyam Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Mon, 13 Jul 2026 06:53 PM (IST)

Bijnor News: बिजनौर में किसान उफनती रामगंगा नदी को ट्यूब के सहारे पार कर पशुओं के लिए चारा लाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी जान को खतरा बना रहता है।

माननगर घाट पर ट्यूब के सहारे नदी पार करते किसान।

माननगर घाट पर ट्यूब के सहारे नदी पार करते किसान।

HighLights

  1.  बिजनौर जिले में माननगर घाट पर बढ़े जलस्तर ने बढ़ाया खतरा।

  2. पशुओं के लिए चारा लाने को जान जोखिम में डाल रहे किसान।

  3. ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी पुल बनाने की मांग की।

संवाद सूत्र, भूतपुरी (बिजनौर)। पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बरसात से एक ओर रामगंगा नदी उफान पर है, दूसरी ओर किसानों के सामने पशुओं का पेट भरने की समस्या खड़ी हो गई है। रामगंगा के गांव माननगर घाट पर इन दिनों ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है, जहां किसान अपनी जान हथेली पर रखकर महज एक ट्यूब के सहारे उफनती रामगंगा नदी पार कर रहे हैं।

नदी के तेज बहाव के बीच ट्यूब पर बैठकर चारा लाने जा रहे किसानों का यह नजारा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद से पिछले कुछ दिनों से दिखने को मिल है। बरसात के कारण रामगंगा का जलस्तर लगातार बढ़ा हुआ है। नदी पार स्थित खेतों तक जाने वाले सभी सुरक्षित रास्ते बंद हो चुके हैं। ऐसे में पशुओं के लिए चारा लाने की मजबूरी किसानों को जान हथेली पर लेकर नदी पार करने को मजबूर कर रही है।

सोमवार को माननगर घाट पर कई किसान ट्यूब के सहारे नदी पार करते दिखाई दिए। उनके हाथों में चारा लाने के बोरे व दरांती थी और सामने तेज बहाव वाली रामगंगा। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात का हर मौसम उनके लिए परीक्षा बनकर आता है। खेत नदी के उस पार हैं, लेकिन वहां पहुंचने का कोई सुरक्षित साधन नहीं है।

आम दिनों में तो किसान नदी पार करके चले जाते हैं, लेकिन मानसून में जलस्तर बढ़ने से यहां समस्या उत्पन्न हो जाती है। मजबूरी में ट्यूब ही उनकी नाव बन जाती है, या फिर बैल बुग्गी के यहां नदी पार करनी पड़ती है।

गांव के पास नहीं है पुल, अधिक दूरी तय करनी पड़ती है 

रामगंगा नदी के पार गांव माननगर व आसपास के ग्रामीणों के खेत स्थित हैं। आम दिनों में उन्हें नदी पार करके ही जाना पड़ता है, जिससे जलस्तर कम होने से अधिक परेशानी नहीं होती है। लेकिन मानसून में यहां समस्या बढ़ जाती है। गांव माननगर व आसपास में रामगंगा नदी पर काेई पुल नहीं है। यहां से करीब चार-पांच किलोमीटर दूर भूतपुरी में रामगंगा पर पुल है। वहीं यदि ग्रामीणों को दूसरे रास्ते से जाना हो तो उन्हें शेरकोट क्षेत्र से होकर लगभग 10 से 12 किलोमीटर दूरी तय करनी पड़ेगी।

ग्रामीणों ने की स्थाई समाधान की मांग 

स्थानीय ग्रामीण नंदराम सिंह, बलराम, भोपाल सिंह, जयप्रकाश, महेंद्र सिंह आदि का कहना है कि वर्षों से इस समस्या को लेकर प्रशासन से सुरक्षित आवागमन और स्थाई समाधान की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ है। हर साल बरसात में किसान इसी तरह अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर होते हैं। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधि व स्थानीय प्रशासन से भी मांग की है। वहीं एसडीएम स्मृति मिश्रा कहा कि जांच कराकर ग्रामीणों की समस्या के समाधान का प्रयास कराया जाएगा।