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'गांधीगिरी' का पालन करते हुए कलक्ट्रेट या DM आवास पर गन्ना भरने की चेतावनी; बिजनौर में मिल पर किसानों का 24 करोड़ बकाया

By Ajeet Chaudhary Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Fri, 30 Oct 2026 04:47 PM (IST)

Bijnor News: बिजनौर में किसान बिलाई मिल द्वारा 24 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे ...और पढ़ें

प्रेसवार्ता के दौरान भाकियू अराजनैतिक के नेता।

प्रेसवार्ता के दौरान भाकियू अराजनैतिक के नेता।

HighLights

  1. भाकियू अराजनैतिक के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने दी चेतावनी।

  2. बिलाई मिल को गन्ना न देने के 20 हजार से अधिक किसानों ने शपथ पत्र भरे।

जागरण संवाददाता, बिजनौर। भाकियू अराजनैतिक के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने प्रेसवार्ता में कहा कि बिलाई मिल को किसान गन्ना नहीं देंगे। जिस दिन मिल इंडेंट जारी करेगी उसी दिन संगठन भी समितियों में पूजन की इंडेंट जारी करेगा। मिल में तौल वाले दिन एक हजार किसान 50-50 क्विंटल गन्ना लेकर आएंगे और कलक्ट्रेट या डीएम आवास पर भरेंगे। संगठन किसानों के साथ रहेगा।

गन्ना समिति पर आयोजित प्रेसवार्ता में दिगंबर सिंह ने कहा कि मिल पर अभी भी किसानों का लगभग 24 करोड़ रुपया बकाया है। मिल को 31 हजार 753 किसान गन्ना आपूर्ति करते हैं। 20 हजार से अधिक किसानों ने मिल को गन्ना न देने के शपथ पत्र भरे हैं। कहा कि किसान जब कलक्ट्रेट के लिए गन्ना लेकर आएंगे तो वे गांधीगिरी का पालन करेंगे।

जहां भी उन्हें रोकने के लिए पहला बैरियर लगाया जाएगा वहीं वे गन्ना पलट देंगे और लौट आएंगे। लेकिन इस गन्ने के पैसे की जिम्मेदारी डीएम की होगी। गन्ना देने के 14 दिन बाद किसान भुगतान भी डीएम से ही लेंगे। डीएम चाहें तो कहीं भी कांटा लगवा लें किसान वहीं गन्ना तौल देंगे लेकिन मिल को नहीं। पहले दिन एक हजार किसान 50 हजार क्विंटल गन्ना लाएंगे और बाद में ये संख्या बढ़ती जाएगी।

कहा कि शासन-प्रशासन ने केवल तीन क्रय केंद्र काटकर बिलाई को संरक्षण देने का काम किया है। मिल ने शीरा बेचकर पैसा अपने काम में लगा लिया और प्रशासनिक अधिकारियों ने ही इसमें साथ दिया। कहा कि जीआरएस पोर्टल पर भी किसानों ने शिकायत की थी जिसे अधिकारियों ने जिले की रैंकिंग खराब होने का हवाला देते हुए रूकवाया था।

अब वह अभियान भी फिर से शुरू किया जाएगा। कहा कि संगठन उद्योगों का विरोधी नहीं है लेकिन अब पानी सिर से उतर गया है। कुछ किसान संगठनों के बड़े नेता भी मिल अधिकारियों के साथ मिलकर किसानों की आवाज को दबाना चाहते हैं। किसानों को भी उनकी असलियत समझ में आने लगी है। जिलाध्यक्ष नितिन सिरोही ने कहा कि लेखपालों के गलत गाटा संख्या भरने से किसान धान तक नहीं बेच पा रहे। प्रदेश उपाध्यक्ष अतुल कुमार ने गन्ने का दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग की।