डिजिटल क्रांति की 'सखी': चूल्हा-चौका करने वाली महिलाओं को मिला रोजगार, कस्टमर का घर बैठे जमा हो रहा बिजली बिल
Bijnor News: बिजली सखी योजना महिलाओं को रोजगार प्रदान कर रही है, जहां वे गांव-गांव जाकर उपभोक्ताओं के बिजली बिल ...और पढ़ें

बिजनौर के ब्लाॅक मोहम्मदपुर देवमल के गांव में उपभोक्ताओं का बिल जमा करतीं बिजली सखी संध्या अधिकारी। जागरण
HighLights
बिजली सखियां गांव-गांव जाकर उपभोक्ताओं के बिजली बिल जमा कर रहीं।
यह योजना महिलाओं को रोजगार और उपभोक्ताओं को सुविधा प्रदान कर रही।
जागरण संवाददाता, बिजनौर। डिजिटल युग में भी बिजली सखी गांव गांव जाकर उपभोक्ताओं के बिजली बिल जमा कर रही हैं। जनता का इन पर इतना विश्वास है कि ये हर माह लगभग 80 हजार उपभोक्ताओं के बिल जमा करती हैं। जितनी राशि ये जमा करती हैं उसका कुछ प्रतिशत कमीशन इन्हें मिल जाता है। यह कमीशन इतना हो जाता है कि कुछ विद्युत सखी तो 40 हजार रुपये या इससे भी अधिक कमा लेती हैं। बिजली सखी की सेवा अब शहरों में भी शुरू की गई है।
गांव में महिलाओं के लिए पहले चूल्हे चौके को ही एकमात्र काम मान लिया जाता था। इसके अलावा गांव में रोजगार के साधन भी नहीं थे। धीरे धीरे महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़नी शुरू हुईं और अलग अलग काम शुरू किए। अधिकतर महिलाओं ने शुरूआत में केवल पापड़, अचार बनाए या कपड़े सिलने का काम किया। काम चला तो धीरे धीरे वे आगे बढ़ती चली गईं। मेहनत के पैसे से आत्मविश्वास भी आया। महिलाओं ने टैडी बियर, सेनेट्री पैड भी बनाने शुरू किए।
केंद्र सरकार ने हर घर तिरंगा अभियान शुरू किया तो हर घर के लिए तिरंगा बनाने की जिम्मेदारी भी महिलाओं को ही सौंपी गई। जिले की महिलाओं ने नौ लाख से अधिक झंडे बनाए। धीरे धीरे बाकी क्षेत्रों में भी महिलाओं को काम मिलने लगा। बैंकों में बीसी सखी तैनात की गईं और विद्युत निगम में उपभोक्ताओं के बिजली के बिल जमा करने का काम महिलाओं को भी दिया गया।
जिले में 504 क्लस्टर बनाकर हर क्लस्टर में एक-एक बिजली सखी बनाई गई। जिले में बिजली सखी गांव-गांव जाकर बिजली के बिल जमा कर रही हैं। उपभोक्ताओं को घर बैठे बिल जमा करने की सुविधा मिल रही है और महिलाओं को रोजगार।
ऐसे होता है बिल जमा
बिजली सखी महिलाओं के मोबाइल में विद्युत निगम के एक्सेस से एक एप डाउनलोड रहता है। उपभोक्ता बिजली सखी को बिल के पैसे देते हैं। बिल में दी उपभोक्ता की आइडी के आधार पर बिजली सखी उतनी राशि को अपने ई-वालेट से आनलाइन कटवा देती है। यानि निगम के पास ऑनलाइन भुगतान हाथों हाथ पहुंच जाता है। उपभोक्ताओं के दिए पैसे से बिजली सखी अपना ई-वालेट रिचार्ज कराती हैं। निगम द्वारा बिजली सखी को कमीशन दे दिया जाता है।
ऐसे मिलता है कमीशन
बिजली सखी को दो हजार रुपये तक के बिल पर 20 रुपये, दो हजार से अधिक के बिल पर एक प्रतिशत कमीशन दिया जाता है। कुछ महीने पहले ही विद्युत सखी की नियुक्ति भी बढ़ाई गई है। अभी इनकी बिलिंग कम है फिर भी ये हर महीने दो करोड़ रुपये से अधिक जमा कर रही हैं। कई बिजली सखी कमीशन में 20 से 30 हजार रुपये महीना तक कमा रही हैं।
आ गया आयकर विभाग का नोटिस
बिजली का बिल ऑनलाइन जमा करने के लिए महिलाएं अपने बैंक खाते में पैसे जमा करके ई वालेट रिचार्ज कराती हैं। इससे महिलाओं के खाते में लेनदेन भी अधिक हो गया है। इन बिजली सखी को आयकर विभाग से नोटिस भी आ गया है। अब राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से इस संबंध में शासन को पत्र लिखा गया है।
इन्होंने कहा
जिले में बिजली सखी अच्छा काम कर रही हैं। हाल में 250 बिजली सखी को प्रिंटर आदि सामग्री वितरित की गई है। ये भी जल्दी ही ज्यादा से ज्यादा बिल जमा करके अपनी आमदनी बढ़ा लेंगी।
-मनोज कुमार वर्मा, उपायुक्त, एनआरएलएम
