बिजनौर, जागरण टीम। विधानसभा 2022 के लिए भाजपा ने पांचों सिटिंग विधायकों के टिकटों को बरकरार रखा है। सपा के कब्जे वाली तीन सीटों पर नए चेहरों को मौका दिया गया है। नजीबाबाद से राजा भारतेंद्र सिंह, नूरपुर से सीपी सिंह और नगीना से डा. यशवंत सिंह को चुनाव मैदान में उतारा गया है। तीनों पुराने नेता हैं और इनका मजबूत राजनीतिक बैकग्राउंड है। शुरुआती दौर में जिले से एक-दो टिकट में बदलाव होने की कवायद चल रही थी, लेकिन ताजा घटनाक्रम के बाद भाजपा ने टिकट काटने का कोई रिस्क नहीं लिया।

विधानसभा चुनाव में पूरी तैयारी के साथ भाजपा भी मैदान में उतर गई है। इससे पहले बसपा सभी आठों सीटों पर और कांग्रेस तीन सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। शनिवार दोपहर भाजपा हाईकमान ने पांच सिटिग विधायक सदर से सुचि चौधरी, बढ़ापुर से सुशांत सिंह, धामपुर से अशोक कुमार राणा, नहटौर से ओमकुमार, चांदपुर से कमलेश सैनी के टिकटों को बरकरार रखा है। हाईकमान का मानना है कि सभी विधायक मजबूत स्थिति में हैं। जबकि सपा के कब्जे वाली तीन सीटों नजीबाबाद से राजा भारतेंद्र सिंह, नूरपुर से सीपी सिंह और नगीना से डा. यशवंत को चुनाव मैदान में उतारा है। शुरुआती दौर में भाजपा हाईकमान की सिटिग विधायकों में से एक-दो टिकट काटने की तैयारी थी, लेकिन बड़े नेताओं के कुछ इस्तीफों को लेकर बदले घटनाक्रम के बाद पार्टी ने कोई रिस्क लेना मुनासिब नहीं समझा। जिले की तीन सीटों पर सपा काबिज है। नजीबाबाद सीट पर राजा भारतेंद्र सिंह को लाया गया है। भारतेंद्र राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी हैं। वह सदर से विधायक और मंत्री रहने के साथ ही बिजनौर लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुके हैं। भारतेंद्र की अपनी साहनपुर रियासत भी इसी सीट का हिस्सा है। इसलिए माना जा रहा है कि भाजपा के वोट बैंक के साथ ही वह मुस्लिम मतों में भी सेंधमारी करेंगे। इसके अलावा नगीना से चुनाव मैदान में उतारे गए डा. यशवंत भी पुराने धुरंधर हैं। वह विधायक और मंत्री रहने के साथ ही नगीना सुरक्षित सीट से सांसद भी रह चुके हैं। पिछले काफी समय से वह नगीना क्षेत्र में सक्रिय थे। उनका टिकट यहां पक्का माना जा रहा था। इनके अलावा ठाकुर बहुल सीट नूरपुर से सीपी सिंह को चुनाव मैदान में उतारा गया है। सीपी सिंह दिवंगत विधायक लोकेंद्र चौहान के भाई हैं। लोकेंद्र की सड़क हादसे में मृत्यु के बाद पार्टी हाईकमान ने नूरपुर उपचुनाव में उनकी पत्नी अवनी सिंह को चुनाव लड़ाया था, लेकिन वह जीत दिलाने में कामयाब नहीं हो पाईं। यह सीट सपा के खाते में चली गई थी। इस बार भाजपा ने सीपी सिंह पर दांव चला है।

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