वेदप्रकाश चौहान, धामपुर(बिजनौर): कई वर्षो से शेरकोट खो बैराज व हरेवली रामगंगा बैराज सिल्ट की समस्या से जूझ रहा है। कई बार विभाग स्तर पर सिल्ट सफाई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। वर्ष 2010 में सिल्ट जमा होने के चलते रामगंगा के गेट न खुलने के कारण कई तटबंध टूट गए थे, जिसके कारण दो दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ के पानी ने जमकर कहर बरपाया था। अब प्रमुख अभियंता ¨सचाई खंड लखनऊ ने अधीक्षण अभियंता मुरादाबाद को पत्र भेजकर हरेवली व शेरकोट बैराज की सिल्ट सफाई कराने के लिए सर्वे के आदेश दिए हैं। ¨सचाई खंड मुरादाबाद ने सर्वे कार्य के लिए विभाग से पांच लाख रुपये डिमांड की है।

शेरकोट खो बैराज एवं हरेवली रामगंगा बैराज वर्षो से सिल्ट की समस्या से जूझ रहे हैं। आलम ये है कि दोनों बैराज में सिल्ट जमा होने के चलते जहां जल भंडारण की क्षमता काफी कम हो गई है, वहीं कभी-कभी बैराज के गेट खोलने में भी ¨सचाई कर्मियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। 19 सितंबर 2010 में हरेवली रामगंगा बैराज में सिल्ट जमा होने के चलते बैराज के गेट नहीं खुल पाए थे, जिसके कारण पोंड क्षेत्र में बने तटबंध कई स्थानों पर टूट गए थे। तभी से ¨सचाई विभाग शासन स्तर से दोनों बैराज की सिल्ट सफाई के लिए शासन से धनराशि की डिमांड कर रहा है। कुछ माह पूर्व प्रमुख अभियंता ¨सचाई खंड लखनऊ भूपेंद्र शर्मा ने अधीक्षण अभियंता मुरादाबाद डीपी ¨सह को पत्र भेजकर दोनों बैराज की सिल्ट सफाई के लिए सर्वे कराने के आदेश दिए। डीपी ¨सह ने मई 2018 को शेरकोट व हरेवली रामगंगा बैराज सिल्ट का सर्वे कार्य कराने के लिए शासन से पांच लाख रुपये की डिमांड की थी, लेकिन अभी तक उक्त धनराशि न मिलने से दोनों बैराज पर सिल्ट सफाई का सर्वे कार्य अटका पड़ा है। उधर अधीक्षण अभियंता मुरादाबाद डीपी ¨सह ने भी सर्वे कार्य के लिए पांच लाख रुपये डिमांड करने की बात स्वीकार की है।

Posted By: Jagran

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