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जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर (भदोही) : तंबाकू उत्पाद के सेवन से दूर रहने के प्रति जागरुक किए जाने को तंबाकू निषेध कार्यक्रम निष्प्रभावी साबित हो रहा है। अभियान पूरी तरह कागजों पर घोड़े की रफ्तार दौड़ रहा है। इसका ज्वलंत उदाहरण प्रतिबंध के बावजूद स्कूल, कालेजों के गेट तक पर धड़ल्ले से होते तंबाकू उत्पाद की बिक्री के रूप में देखा जा सकता है।

तंबाकू का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इससे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है। तंबाकू उत्पादों के पैकेट से लेकर डिब्बों तक पर मोटे अक्षरों में अंकित इस चेतावनी के बाद भी इसके सेवन के विशेषकर युवा वर्ग व स्कूली बच्चों में पान मसाला, गुटका आदि के सेवन की बढ़ती लत पर अंकुश लगाने के लिए शासन की ओर से तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। यहां तक कि प्राथमिक से लेकर उच्च स्तर तक शिक्षण संस्थान के समीप तंबाकू उत्पाद की बिक्री करने पर प्रतिबंध लगा है। शिक्षण संस्थानों के पास तंबाकू उत्पाद किसी भी कीमत पर नहीं बिकते पाया जाना चाहिए। साथ ही किशोरवय को तंबाकू उत्पादों की बिक्री व सेवन से बचाने के लिए दुकानों पर किशोरवय बच्चों को बैठाकर तंबाकू उत्पाद की बिक्री करने पर कड़ी कार्रवाई का फरमान भी जारी किया गया है। बावजूद इसके शिक्षण संस्थानों के पास तंबाकू उत्पाद की बिक्री पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग व प्रशासनिक उदासीनता के चलते ऐसे कारोबार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। जागरुकता अभियान के नाम पर शासन स्तर से गोष्ठियों, रैली आदि के लिए धन भी जारी किया जाता है।

Edited By: Jagran