भदोही में रोडवेज बसों का ठहराव नहीं, पर बना दिए दो बस अड्डे, हाई स्पीड ट्रेनों और मेट्रो के दौर में यहां बस सेवा तक नहीं
भदोही जिले में 32 वर्षों से रोडवेज बस सेवा का अभाव है, जबकि करोड़ों रुपये खर्च कर दो बस अड्डे ...और पढ़ें

भदोही में 32 साल से बस सेवा नहीं, करोड़ों के बस अड्डे बने शोपीस।
HighLights
भदोही में 32 वर्षों से रोडवेज बस सेवा का अभाव।
करोड़ों की लागत से बने दो बस अड्डे वीरान पड़े हैं।
जनता को आवागमन में भारी परेशानी, डग्गामार वाहनों पर निर्भरता।
जितेंद्र उपाध्याय, जागरण, भदोही। कालीन नगरी के लोग 32 वर्ष से रोडवेज सुविधा के लिए परेशान हैं। जिले से एक भी बस नहीं चलने से उन्हें आटो या टोटो जैसे वाहनों का प्रयोग करना पड़ रहा है। उधर एक भी बस न चलने के बाद भी सरकार की ओर से लगभग छह करोड़ से अधिक रुपये से भदोही और ज्ञानपुर में बस अड्डे बना दिए गए।
यहां बसों का ठहराव या संचालन तो दूर की बात है, यह जरूर कि इसमें बेसहारा मवेशी, शरारती तत्वों का जमावड़ा जरूर होता है। जनता के पैसों की किस तरह बर्बादी की जाती है यह दोनों बस अड्डे इस बात की गवाही दे रहे हैं। इनमें ज्ञानपुर बस अड्डा 2008 में बना था, बसों का संचालन न होने से यह भवन खंडहर में तब्दील हो गया। वर्तमान सरकार में फिर से नया भवन और तीन करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च किए गए। भवन बनने के बाद यह परिसर फिर से वीरानी का दंश झेल रहा है।
कालीन नगरी होने के कारण हर बाहरी व्यक्ति की यह जिज्ञासा रहती है कि वह कालीन को बुनते हुए देखे। यह जाने के एक कालीन बनाने में कितने दिन, लागत और डिजाइन किस तरह बुनकर तैयार करते हैं। उसी यह आशा तभी पूरी होगी जब उसके पास या तो अपना साधन हो या फिर कोई वाहन यहां आकर रिजर्व करे। इसके अलावा 20 लाख की आबादी वाले जिले के लोगों को भी बराबर कहीं न कहीं आना जाना होता है पर कोई सार्वजनिक साधन ही नहीं है।
वाराणसी या प्रयागराज से लोग सार्वजनिक साधन से गोपीगंज तो आ सकते हैं लेकिन उसके बाद जिले में कहीं भी आने जाने के लिए कोई साधन नहीं है। 2008 में यह आशा जगी थी कि ज्ञानपुर में बस अड्डा बन गया है तो यहां से बसें चलेंगी लेकिन कुछ दिनों बाद बसें ऐसी गायब हुईं कि मानो यहां के लिए उन साधनों को चलाया ही नहीं गया था।
भदोही में तीन करोड़ से बने बस अड्डे से भी उम्मीद जगी कि यहां बसें आएंगी। कुछ माह पूर्व इस अड्डे का परिवहन निदेशक ने निरीक्षण भी किया और आश्वस्त किया था कि छह बसें तो प्रयागराज और वाराणसी के लिए चलेंगी ही लेकिन हुआ कुछ नहीं। जब बड़े अधिकारी भी राजनीतिक जुमले कहकर चले जा रहे हैं तो स्थानीय अधिकारी भी प्रया करने की बात कहकर चुप्पी साध लेेते हैं।
बात हाई स्पीड ट्रेनों की और भदोही में 32 साल से बस सेवा तक नहीं
वाराणसी-प्रयागराज के मध्य भदोही जिला 32 वर्ष पहले बना। सार्वजनिक परिवहन के मामलों में दोनों जिले तो काफी आगे हैं पर भदोही जिला अब भी पिछड़ेपन का शिकार है। भदोही से ज्ञानपुर 13 किमी, गोपीगंज से ज्ञानपुर 6 किमी तक आटो, टोटो आदि हैं। पर ज्ञानपुर से जिला मुख्यालय सरपतहां 7 किमी, मुख्यालय या ज्ञानपुर से विकास भवन कंसापुर 5 किमी पहुंचने के लिए कोई नियमित सार्वजनिक साधन की व्यवस्था नहीं है।
लोग आटो रिजर्व कर या सवारी भरने के बाद आटो से जाने को विवश हैं। यह तब है देश में हाई स्पीड ट्रेनें चल रही हैं। शहरों को ऐसी ट्रेनों से जोड़ने का सपना दिखा रहे हैं। ऐसे में कालीन नगरी के नाम से विश्वभर में प्रसिद्ध भदोही के लोग आटो, सफारी या डग्गामार वाहनों से ही मंजिल तय कर रहे हैंं।
ज्ञानपुर मुख्यालय से छह किमी दूर सरपतहां में जिला न्यायालय है, यहीं जिला मुख्यालय भी और इससे सात किमी दूर कंसापुर गांव में विकास भवन है। तीनों स्थानों पर हर रोज लगभग 4500 लोग रोज पहुंचते हैं। इन्हें इन स्थानों पर पहुंचने के लिए रोज आने जाने में 40 से 50 रुपये खर्च करना पड़ता है। आश्चर्य की बात यह कि कार्यालय नगर पंचायत ज्ञानपुर की सुविधा लेते हैं। पर साधन के नाम पर यहां किसी ने रोडवेज बस या सिटी बस चलवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया।
इन स्थानों के लिए निर्धारित समय पर यदि सिटी बस ही चल जाए और आमजन को काफी लाभ मिल जाए। इसके अलावा जिला मुख्यालय से दूसरे जिलों के लिए भी नियमित रोडवेज सेवा का अभाव है। राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर बड़े शहरों के लिए बसें जरूर मिलती हैं, लेकिन कोनिया, छेछुआ, सुरियावां, दुर्गागंज, चौरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जाने के लिए लोगों को डग्गामार वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे अधिक किराया, अनियमित सेवा और सुरक्षा से जुड़े सवाल भी सामने आते हैं।
दो बस अड़डे पर ठहराव किसी बस का नहीं
2008 में जिला मुख्यालय ज्ञानपुर में था। उस समय की बसपा सरकार में परिवहन मंत्री रहे रामअचल राजभर ने ज्ञानपुर में बस अड्डे का उद्घाटन किया था। दो महीने तक यहां से छह बसेें, वाराणसी, प्रयागराज, मीरजापुर, कानपुर, खजुराहो तक बस चली थी। इसे बाद से सारी बसें गायब हो गईं। बाद में जिला मुख्यालय और न्यायालय सरपतहां में चला गया और विकास भवन कंसापुर में बन गया। लोगों को आवागमन में तब से परेशानी शुरू हुई जो अब तक बनी हुई है। भदोही में भी बस अड्डा बना है लेकिन यहां एक भी बसों का न तो ठहराव है न ही यहां से संचालन है।
बोले कारोबारी
जिला सड़क परिवहन के मामले में फिसड्डी बना हुआ है। विवश होकर लोग आटो, डग्गामार वाहनों या रिजर्व वाहन से यात्रा कर रहे हैं। जिले में सिटी बसों का संचालन तो दूर की बात है परिवहन निगम की बस सेवा से भी लोग वंचित है। जबकि भदोही, ज्ञानपुर, औराई में करोडों रुपये खर्च कर रोडवेज बस स्टेशन का निर्माण कराया गया है। - रामू शर्मा, अध्यक्ष रजपुरा कालोनी सेवा समिति
सड़क परिवहन की सुविधा न होने के कारण ग्रामीण अंचलों के लोगों को काफी परेशानी झेलनी होती है। जौनपुर-मीरजापुर और वाराणसी-प्रयागराज वाया गोपीगंज रोडवेज बसों का संचालन तो हो रहा है लेकिन इसका लाभ जनपदवासियों को नहीं मिल रहा। यह बसे सीधे निकल जाती है और यात्रा बैठे इंतजार करते रहते हैं। - डा. शैलेष कुमार पाठक, चिकित्सक
कचहरी आने वाले वादकारी जब यह कहते हैं कि साहब साधन नहीं मिला, इससे तारीख पर देरी हो गई। वादी की बात सुनकर बड़ा दुख होता है। यह समस्या जड़ कर चुकी है लेकिन जिला प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि तक इस समस्या को जानबूझकर अंजान बने बैठे हैं। इसके लिए प्रयास होना चाहिए। - सुधाकर पांडेय, अधिवक्ता
सरकार से उम्मीद है कि जिले में सार्वजनिक साधन की व्यवस्था हो जाएगी। हालांकि जनप्रतिनिधि इसके लिए कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं। यह आश्चर्य ही है कि जिले में अब तक रोडवेज बसों का संचालन नहीं हाे रहा है। जिला प्रशासन को भी इसके लिए पहल करनी चाहिए। रोडवेज से संबंधित प्रस्ताव शासन में भेजना चाहिए। - अरविंद मौर्य, व्यापारी
डीघ क्षेत्र के वादीकारी न्यायालय आते हैं तो उनकी दशा देखकर मन खिन्न हो उठता है। उन्हें छेछुआ, भुर्रा से आने में चार से पांच साधन बदलने पड़ते हैं। न्यायालय तक पहुंचने में उनका लगभग डेढ़ सौ रुपये खर्च हो जाता है। उसके बाद अपनी तारीख देकर लौटते हैं। यदि बस की सुविधा हो तो उनका समय, पैसा दोनों बचेगा। इसके लिए सभी को प्रयास करना चाहिए। - शमशाद खान, अधिवक्ता
जिले की स्थापना के तीन दशक के बाद भी परिवहन निगम की बस सेवा से वंचित रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। भदोही में तीन करोड की लागत से निर्मित रोडवेज बस स्टेशन महज शोपीस बना है। जिले के सीमावर्ती गांवों से जिला मुख्यालय जाने के लिए कोई सीधा साधन नहीं है। कंधिया क्षेत्र के लोगों को मुख्यालय जाने के लिए तीन से चार साधन बदलना पड़ते हैं। - गिरधारी जायसवाल, सभासद
ख्याति के अनुरूप जिले में न तो रेल साधन संतोषजनक है न ही परिवहन व्यवस्था है। इससे आम लोगों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। जनहित से जुड़ी गंभीर समस्या न तो चुनावी मुद्दा बनती है न ही जनप्रतिनिधि इसे गंभीरता से लेते हैं। जबकि इसके कारण जिले की 80 प्रतिशत जनता को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। - आरके बोथरा, निर्यातक
जिले में सिटी बस संचालन को लंबी प्रक्रिया है। बस डिपो के लिए विभाग ने शासन में प्रस्ताव भेजा है। मूंसीलाटपुर में डिपो के लिए जमीन चिन्हित की गई है लेकिन राजस्व विभाग ने उसे विभाग के नाम नहीं किया है। जमीन विभाग के नाम हो जाए तो उच्चाधिकारियों के निर्देश पर बसों के ठहरने आदि की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी।
