जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर (भदोही) : नाम को गोवंश अस्थायी आश्रय स्थल। कागजों में ही सुविधाएं। आलम यह है कि बेजूबानों के लिए बना उनका आश्रय स्थल कब्रगाह बन चुका है। तीन माह में 150 मवेशियों की जान जा चुकी है तो कई अभी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। हालांकि पशु पालन विभाग का दावा है कि अब तक मृत मवेशियों का आंकड़ा 89 है। चारा के लिए बजट की कोई कमी नहीं है। डिमांड आते ही धनराशि उपलब्ध करा दी जाती है।

सत्ता की चाबी हाथ आते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवैध स्लाटर हाउस को बंद करवा दिया। बेसहारा मवेशियों की बाढ़ आ गई और वह किसानों के फसल बर्बाद करने लगे। शासन ने बेसहारा मवेशियों के लिए प्रत्येक न्याय पंचायत में अस्थायी आश्रय स्थल और एक स्थायी आश्रय स्थल निर्माण के लिए फरमान जारी कर दिया। स्थायी आश्रय स्थल का अभी निर्माण चल रहा है जबकि सात अस्थायी आश्रय स्थल संचालित हैं। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 1008 बेसहारा मवेशी पंजीकृत हैं। तीन माह में अब तक 89 मवेशियों की मौत हो चुकी है। विभागीय आंकड़े चाहे जो हों लेकिन हकीकत यह है कि अकेले पूरेरजा स्थित अस्थायी आश्रय स्थल में 20 से अधिक मवेशियों की मौत हो चुकी है। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से मवेशियों का इलाज समय से नहीं हो पा रहा है। अपनी गर्दन बचाने के चक्कर में मवेशियों को टैग भी नहीं लगाया जा रहा है। औराई चीनी मिल में मंडलायुक्त के फटकार के बाद भी अभी तक मवेशियों को खाने के लिए चरनी का निर्माण नहीं कराया जा सका है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. जेपी सिंह ने बताया कि चारा के बजट पर्याप्त है। चीनी मिल में मंडलायुक्त के निर्देश के क्रम में कार्य कराया जा रहा है।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप