जागरण संवाददाता ज्ञानपुर (भदोही) : माह भर से सुरियावां क्षेत्र के वरुणा के तटवर्ती क्षेत्र में जनपद सीमा पर फसल रूपी डूबी पूंजी से गृहस्थी की गाड़ी बीच मझधार में फंस गई है। फसल डूबकर नष्ट होने के बावजूद जिला प्रशासन की ओर से कोई मदद की आस न दिखने से किसानों ने बुधवार को सत्याग्रह कर विरोध जताया। फसल नष्ट होने से किसानों की रक्तरंजित आंखों से निकल रहे आंसू की सुधि अभी तक न तो किसी अधिकारी ने नहीं ली है और न ही जिले का कोई जनप्रतिनिधि ही किसानों की पीड़ा सुनने को पहुंचा। जिससे प्रभावित किसानों में जिला प्रशासन व जन प्रतिनिधियों के प्रति रोष व्याप्त है।

क्षेत्र के तुलापुर गांव निवासी विवेक कुमार दुबे कहते हैं कि वरुणा नदी के तटवर्ती क्षेत्र में स्थित चार बीघे में धान की फसल की रोपाई की थी। माह भर पहले तक लहलहा रही धान की फसल को गृहस्थी की गाड़ी की आगे की जरुरतों को पूरा किए जाने के लिए आगे की योजना भी परिवार लोगों के साथ निर्धारित कर लिया था। लेकिन लगातार बारिश व बाढ़ के कहर से उफनाई वरुणा नदी ने सब कुछ चौपट कर दिया। माह भर से खेतों में घुटने भर पानी से फसल डूबकर नष्ट होने से सारी उम्मीदें धरी की धरी रह गईं और आस पर पानी फिर गया। फसल चौपट होने से विपदा में पड़े किसानों की सुधि लेने के लिए अभी तक किसी प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंच पाया है। पूंजी नष्ट होने पर सरकार तक मामला पहुंचाकर मदद के लिए अभी तक किसी भी जन प्रतिनिधि की ओर से खबर नहीं ली गई है। जिससे बर्बाद किसानों के सामने आगे अंधेरा ही दिख रहा है।

सत्याग्रह कर विरोध जताने वालों में शामिल प्रभावित किसान राजाराम यादव का कहना रहा कि तीन बीघा खेत में धान की रोपाई की थी, लेकिन वरुणा का कहर सब कुछ ले डूबा। घर पर रखी पूंजी भी रोपाई में पूंजी लगा दी थी। अब तो आगे कुछ नहीं सूझ रहा है कि करें तो क्या करें। कोई साहब भी नहीं खबर ले रहे हैं जिससे कि सरकारी स्तर से भी कुछ मदद की आस दिख रही हो। आगे भोजन का भी लाला दिखाई पड़ रहा है।

अमित लाल गौतम कहते हैं कि फसल नष्ट होने से आंखों से गिर रहा आंसू पोंछने के लिए विधायक सांसद समेत कोई भी मदद को नहीं दिख रहा है। वोट लेने के लिए तो लंबी चौड़ी बातें करते हैं आज जब हम लोगों पर वरुणा के प्रकोप का वज्र पड़ा है तो कोई भी नहीं दिख रहा है। गृहस्थी की तंगी से परेशान ¨चतामणि कहते हैं कि सब कुछ चौपट हो गया, अब तो केवल भगवान का भरोसा है कि आगे कैसे जीवन निर्वाह हो पाएगा। बच्चों की पढ़ाई व गृहस्थी का खर्च के लिए फसल से रखी उम्मीद समाप्त हो गई है। इन किसानों के अतिरिक्त सत्याग्रह में शामिल राजमणि यादव, अमित लाल गौतम, दया शंकर, पूर्ण चंद्र गौतम, ¨रकू गौतम, सोमनाथ, साजन गौतम व खुशहाल ने भी अपनी व्यथा खुलकर बयां किया।

दरअसल, ये सब किसान तो महज बानगी भर हैं जिले की सीमा से तीन विकास खंड सुरियावां, अभोली व भदोही से होकर गुजरी वरुणा दिन-ब-दिन अतिक्रमण की चपेट में आकर सिमटती जा रही हैं। जिससे बारिश के मौसम में जब जब भी बाढ़ रुपी प्रलय देश के अन्य स्थानों में आता है तो बाढ़ के प्रभाव का पानी वरुणा को भी उफान पर ला देता है। वरुणा के रौद्र रूप धारण करने से किसानों की फसल दरसाल इसी तरह चौपट होने से किसानों की कमर टूट जाती है। पानी के दबाव से ओवर बह रही वरुणा नदी के आगोस में आई फसल पूरी तरह नष्ट हो जाती है।

बारिश के लिहाज से इस साल अच्छी बारिश के बाद भी किसानों के सामने परेशानी ही दिख रही है। हजारों बीघा फसल नष्ट होने का स्थायी समाधान नहीं दिख रहा है। दलहन समेत धान की फसलें बर्बाद हो चली है। जिससे अन्नदाता के समक्ष खाने के लाले दिख रहे हैं। प्रशासनिक स्तर से डूबी फसलों की सुरक्षा के लिए भविष्य में कोई स्थाई व्यवस्था प्रशासनिक स्तर से नहीं दिख रही है।

Posted By: Jagran