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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 23, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

छोटे-मझोले कारोबारियों ने लगाई राहत की उम्मीद

By JagranEdited By:
Published: Thu, 23 Jan 2020 06:29 PM (IST)

आगामी माह पेश होने के वाले केंद्रीय बजट को लेकर कालीन व्यवसायियों में उम्मीद की किरन जगी है। विशेषकर उद्योग ...और पढ़ें

छोटे-मझोले कारोबारियों ने लगाई राहत की उम्मीद
छोटे-मझोले कारोबारियों ने लगाई राहत की उम्मीद

जांस, भदोही : पेश होने के वाले केंद्रीय बजट को लेकर कालीन कारोबारी उम्मीद लगाए बैठे हैं। उद्योग से जुड़े छोटे और मझोले कारोबारी बजट को लेकर आशान्वित हैं। कालीनों की धुलाई, काती रंगाई व बुनाई कराने वाले कांट्रैक्टर को वित्तमंत्री के पिटारे से राहत मिलने की उम्मीद है। जीएसटी व ई-वे बिल जैसे उलझाऊ नियमों को लेकर परेशान छोटे व्यवसायी मुक्ति चाहते हैं। बता दें कि भदोही को विशिष्ट निर्यात क्षेत्र का दर्जा देकर भारी राहत प्रदान की गई वहीं ओडीओपी से बेहतर संभावनाओं का सृजन किया गया। आगामी बजट पर व्यवसायियों की नजरें टिकी हुई हैं।

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कारोबारियों की प्रमुख मांगें

- एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) से परिक्षेत्र में मूलभूल सुविधाएं विकसित हों।

- ढांचागत सुविधाओं से लैस होने के बाद व्यवसाय के लिए बेहतर वातावरण बनाएं।

- कांट्रैक्टर, काती रंगाई व धुलाई के लिये बिजली समेत हर सुविधाएं सुनिश्चित कराई जाए।

- आगामी बजट में सरकार को छोटे-मझोले व्यवसायियों के हित में कदम उठाना चाहिए।

- कारोबारियों को आयकर में छूट मिलने के साथ प्रोत्साहन राशि में भी वृद्धि होनी चाहिए।

- ओडीओपी से प्रोत्साहन राशि मिले और ड्यूटी ड्रा बैंक की दरों को बढ़ाया जाए।

- गैर निर्यातक व्यवसायियों को ध्यान में रखें और बजट में विशेष प्रावधान करें।

- कालीन परिक्षेत्र के ढांचागत सुधार की दिशा में सरकार से पहल की अपेक्षा।

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जीएसटी व ई वे-बिल कालीन उद्योग के लिए परेशानी का सबब है। 50 हजार तक के माल पर लगने वाला ई-वे बिल कालीन उद्योग के लिए मुश्किल भरा है। इसे समाप्त करें। जीएसटी प्रावधान का सरलीकरण हो।

-इश्तियाक डायर ओडीओपी सरकार का स्वागत योग्य कदम है। क्रियान्वयन में पारदर्शिता हो। लाभ हर वर्ग के व्यवसायियों को मिलेगा। परिक्षेत्र को ढांचागत सुविधाओं से लैस करने के साथ व्यवसाय के लिए बेहतर वातावरण तैयार करें।

नफीस डायर देश के सबसे बड़े लघु उद्योग को सरकार से प्रोत्साहन की जरूरत है। प्रोत्साहन मिलने से न सिर्फ निर्यात बढ़ेगा बल्कि उद्योग से जुड़े लाखों लोगों को इसका लाभ मिलेगा।

मनोज सुराना कालीन उद्योग की बेहतरी के लिए सरकार गंभीर है। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने भी उद्यमियों को समस्याओं को सुना था जबकि जल्द ही प्रदेश सरकार ने भी उद्योग के प्रति उदारता का परिचय दिया। बजट में उद्योग हित में अलग प्रावधान हों।

आसिफ अंसारी

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एक नजर

1800 : गैर निर्यातक कारोबारी

35 से 40 करोड़ : व्यवसाय प्रति माह