जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर (भदोही) : खरीद सत्र शुरू हुए 45 दिन हो गए लेकिन विपणन सहित अन्य एजेंसियों के केंद्रों पर अभी तक महज पांच हजार टन गेहूं खरीदा जा सका है। प्राइवेट एजेंसी ने सरकारी केंद्रों की रफ्तार रोक दी है। निर्यात पर रोक लगने के बाद कुछ उम्मीद जगी है लेकिन किसान अब उत्पादन को अपने घरों में ही सुरक्षित रखने में जुटे हैं। स्थिति को देखते हुए उनका कहना है कि अभी और दाम बढ़ सकता है।

गेहूं खरीद सत्र 2022-23 में शासन की ओर से जिले को 37 हजार टन खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए जिले में 38 खरीद केंद्र खोले गए हैं। खरीद शुरू हुए डेढ़ माह से अधिक का समय बीत गया लेकिन रफ्तार नहीं पकड़ रही है। विपणन केंद्रों की स्थिति तो कुछ संतोषजनक है लेकिन अन्य 28 केंद्रों की स्थिति बहुत ही खराब है। एक निजी एजेंसी ने अब तक 10 हजार टन से अधिक गेहूं खरीदा और एक्सपोर्ट भी कर दिया है। बताया जाता है कि उसके आदमी किसानों के घर पहुंचकर 1900 से 1950 रुपये प्रति क्विटल दाम दे रहे हैं। ऊंज के किसान भोलानाथ का कहना है कि केंद्र पर ले जाने पर 2015 रुपये मिलता है। इसमें उतराई- छनाई के नाम पर 20 रुपये प्रति क्विटल देना पड़ता है। इसके साथ ही केंद्र पर पूरा दिन समय भी नष्ट हो जाता है। व्यापारी घर पर आया और 1950 रुपये नकद देकर गेहूं खरीद ले गया। जिला खाद्य विपणन अधिकारी देवेंद्र सिंह ने कहा अब तक पांच हजार टन खरीद की जा चुकी है। निर्यात पर रोक लगने के बाद खरीद बढ़ने की कुछ उम्मीद है। मोबाइल खरीद केंद्रों को सक्रिय किया जा रहा है। सहकारी समिति के सचिवों को खरीद कार्य में जोड़ा जा रहा है। वह किसानों के घर जाकर उन्हें क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए प्रेरित करेंगे।

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