जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर (भदोही) : शासन ने सांसद आदर्श गांव के विकास कार्यों की रिपोर्ट तलब की है। इसको लेकर अधिकारियों में खलबली मची हुई है। विभागीय अधिकारी धूल फांक रही फाइलों को खोजने में जुट गए हैं। हकीकत तो यह है कि सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के प्रस्तावित गांवों के विकास को लेकर कार्ययोजना तो तैयार की गई लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते मूर्त रूप नहीं ले सका।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में सभी सांसदों को प्रत्येक वर्ष एक-एक गांव को चयनित कर विकसित करने को कहा था। उन्होंने खुद वाराणसी के जयापुर को आदर्श गांव के रूप में चयनित किया था। सांसद वीरेंद्र सिंह ने तीन वित्तीय वर्ष में कौलापुर, कैड़ा और विक्रमपुर को सांसद आदर्श गांव के रूप में चयनित किया था। सांसद गांव के विकास को लेकर बीस विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके लिए अलग-अलग कार्ययोजना भी तैयार किया गया लेकिन यह सब कागजों में सिमट कर रह गया। कौलापुर बुनियादी सुविधाओं से आज भी तरस रहा है। अभी तक प्रस्तावित उप स्वास्थ्य केंद्र आदि का निर्माण नहीं कराया जा सका है। ग्रामीण पेयजल परियोजना की बुनियाद भी रखी गई तो उसमें में घटिया पाइप का इस्तेमाल कर दिया गया। आए दिन जगह-जगह पाइप चोक हो जा रही हैं। तालाबों की स्थिति पूरी तरह बदहाल हो चुकी है। सड़क पर निकलना मुश्किल हो गया है। चंद्रमणि मिश्र के घर के सामने बारह महीने पानी इकट्ठा होने से ग्रामीण परेशान हो रहे हैं। अमूमन यही स्थिति तीनों चयनित गांवों की है। सांसद आदर्श गांव की बदहाल स्थिति को देखकर शासन से सख्त रुख अख्तियार किया है। मुख्य विकास अधिकारी से विकास कार्यों की रिपोर्ट तलब की है। सांसद आदर्श गांवों के विकास कार्यों की शासन ने रिपोर्ट तलब की है। इसके लिए विभागीय अधिकारियों के साथ अभी तक बैठक नहीं हो सकी है। बैठक कर विकास कार्यों की रिपोर्ट संबंधित विभागों से लेकर शासन को अवगत कराया जाएगा।

विवेक त्रिपाठी, मुख्य विकास अधिकारी।

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