जागरण संवाददाता, भदोही: गत दिनों विशिष्ट निर्यात क्षेत्र का दर्जा मिलने के बाद कालीन उद्योग के लिए शुक्रवार को पुन: एक राहत की खबर मिली है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने कालीन उद्यमियों को निर्यात पर मिलने वाले ड्यूटी ड्रा-बैक की दरों में वृद्धि कर दी है। इससे उद्यमियों को काफी बल मिलेगा। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) ने नई दरों को उद्योग के लिए टानिक बताया है।

सीईपीसी के स्थानीय कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार सिल्क कालीनों पर अब तक नौ फीसद ड्रा-बैक मिलता था जिसे बढ़ाकर 14.9 फीसद कर दिया गया है। अधिकतम कै¨पग को भी 3490.70 से बढ़ाकर 7205 किया गया है। धागों से बने कालीनों पर ड्रा-बैक पूर्व की भांति 1.70 प्रतिशत ही रहेगा लेकिन कै¨पग को हटा लिया गया है जिससे लोगों को फायदा होगा। परिषद के चेयरमैन महावीर प्रताप उर्फ राजा शर्मा ने बताया कि अब तक हस्तनिर्मित ऊनी दरियों पर 1.50 फीसद ड्रा-बैक मिलता था जिसे 3.7 फीसद करते हुए कै¨पग 19.70 रुपये से बढ़ाकर 70 रुपये कर दिया गया है।

इसी तरह हस्तनिर्मित ऊनी कालीनों पर ड्रा-बैक यथावत रखते हुए उस पर लगी अधिकतम 303.20 रुपये की कै¨पग को बढ़ाकर 394 रुपये कर दिया है। 15 प्रतिशत से अधिक सिल्क लगे कालीनों की ड्राबैक प्रतिशत भी यथावत रहेगी, लेकिन कै¨पग 492.70 से बढ़ा 1107 रुपये कर दिया है। 19 दिसंबर से लागू होने वाली नई अधिसूचना में हैंड टफ्टेड कालीनों पर अब 3.1 प्रतिशत के बजाए 4.6 प्रतिशत ड्रॉ बैक मिलेगा, जबकि कै¨पग को 96 रुपये से बढ़ाकर 114 रुपये कर दिया गया है। घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय हाल ही में भदोही को घोषित किए गए टाऊन आफ एक्सपोर्ट एक्सेलेंस से जोड़कर देखा जा रहा है। उधर नई दरों के बारे में सूचना मिलते ही कालीन उद्योग में खुशी की लहर दौड़ गई है। सीईपीसी सदस्यों ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि इससे महंगाई से जूझ रहे उद्योग को राहत मिलेगी। परिषद के प्रथम उपाध्यक्ष सिद्धनाथ ¨सह, परिषद के उपनिदेशक विजय कुमार सिनहा ने आदि ने इसका स्वागत किया है।

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