जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर(भदोही): लोकसभा हो या फिर विधानसभा चुनाव। ब्लाक संसाधन केंद्र पर आधार फीडिग हो या फिर शिक्षकों का ऐरियर, पेंशन आदि-आदि कार्यों में पढ़ाई के लिए भेजे गए छात्रों के कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है। पढ़ाने के लिए लगाए गए अनुदेशकों की भी मुंह मांगी मुराद मिल जाती है। वह ब्लाक संसाधन केंद्रों पर डेरा डाल कर खेल में जुटे रहते हैं। विभागीय अधिकारी भी इस कदर मेहरबान हैं कि शासन के फरमान को रद्दी की टोकरी में डालकर साल में तीन बार बीआरसी से ही अटैच कर देते हैं।

परिषदीय विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता को लेकर शासन-प्रशासन की ओर से लाख कोशिश भले की जा रही हो लेकिन हकीकत में स्थिति जस की तस बनी हुई है। बेसिक शिक्षा विभाग में पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा के लिए अनुदेशकों की तैनाती की गई है। नियमानुसार अनुदेशक विद्यालयों में पहुंचकर कक्षा छह से लेकर आठ तक के बच्चों को कंप्यूटर का ज्ञान सिखाएं। यह सब कागजों पर ही सिमटता दिख रहा है। जांच कर लिया जाए तो साल में कई माह वह ब्लाक संसाधन केंद्र पर ही अटैच रहते हैं। मेहरबान खंड शिक्षा अधिकारी अपने खास अनुदेशकों को फीडिग आदि कार्य कराने के लिए अटैच कर लेते हैं। हद तो तब हो जाती है जब वह लिखित पत्र जारी कर संबद्ध करते हैं। यह स्थित अधिकारियों की तब है जब शासन ने किसी भी प्रकार की संबद्धता पर रोक लगा दी है। अनुदेशक भी स्कूलों के जाने बजाए ब्लाक संसाधन केंद्र पर मडराते रहते हैं। यूनिफार्म, जूता, मोजा, किताब, स्वीटर आदि मामलों को सलटाने में लगे रहते हैं। विभागीय अधिकारी भी जानते हुए अंजान बने रहते हैं। दबे जुबान अधिकारियों का कहना है सरकारी कार्य से कंप्यूटर आदि मंगाया जाता है। कार्य संपन्न होने के बाद स्कूलों को वापस कर दिया जाता है।

Posted By: Jagran

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