जासं, भदोही : प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत फार्मूले पर कालीन उद्योग भी काम करने लगा है। कोरोना काल में उपजे हालात को देखते हुए विश्व बाजार में अनिश्चितता की स्थिति बनी है। ऐसे में स्वदेशी बाजार में ही कालीनों की बिक्री के लिए मंच तैयार किया जा रहा है। दिल्ली के ग्रेटर नोएडा में चार दिवसीय हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी आयोजित करने का खाका तैयार कर लिया गया है। मुंबई में पिछले नौ साल से प्रदर्शनी का आयोजन करने वाली संस्था एचजीएच इंडिया इसका आयोजन कर रही है।

भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय व उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी में कालीनों के साथ अन्य हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा। विश्व के प्रमुख देशों द्वारा भारत में व्यापार की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं जबकि हम सिर्फ दूसरे देशों पर निर्भर हो रह गए। कहा जा रहा है कि प्रयास किया जाए तो अपने ही देश में कालीनों का बेहतर बाजार सृजित किया जा सकता है। अमेरिका कालीन उत्पादों का सबसे बडा खरीदार देश है जबकि जर्मनी, फ्रांस सहित अन्य यूरोपीय देशों में कालीनों का काफी प्रचलन है। विशेषकर भारतीय कालीन उत्पादों को लोग खूब पंसद करते हैं। वैश्विक महामारी कोरोना के कारण प्रमुख आयातक देशों के आयातक प्रभावित हुए हैं। ऐसे में व्यवसाय पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। यही कारण है कि स्वदेसी बाजार विकसित करने पर बल दिया जा रहा है। बता दें कि दिल्ली, मुंबई में पहले भी देश के हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाती थी जिसे काफी सफलता मिलती थी। दो साल से कोई भी आयोजन नहीं हो सका है। ऐसे में ग्रेटर नोएडा में आयोजित प्रदर्शनी से व्यवसायियों को काफी उम्मीदें हैं।

----------------------विदेशी व्यापारी हमारे देश में अपने विभिन्न उत्पाद बेच रहे हैं। पूरा विश्व भारत की तरफ देख रहा है। देश में होने वाले हस्तनिर्मित उत्पादों के लिए हम भी बेहतर वातावरण तैयार कर बाजार विकसित करने में सक्षम हैं। इसके लिए 30 नवंबर से तीन दिसंबर तक प्रदर्शनी आयोजित करने की तैयारी चल रही है। इसमें भाग लेने वालों को यूपी सरकार द्वारा सब्सिडी भी दी जा रही है जबकि आयोजन में भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा सहयोग किया जा रहा है।

-शिवकुमार गुप्ता, क्षेत्रीय निदेशक एचजीएच इंडिया

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