- नमामि गंगे

- औषधीय और जैविक खेती करने वाले 100 किसान होंगे शामिल, तैयारी में जुटा कृषि विभाग

- पीएम के प्रस्तावित कार्यक्रम में दो स्टाल आवंटित होने के आसार

- गंगा तटवर्ती 47 गांवों में तुलसी, लेमनग्रास व खस की हो रही है खेती जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर (भदोही) : विश्व पटल पर कालीन की चमक को लेकर विख्यात भदोही अब अपनी औषधीय और जैविक खेती के लिए डंका बजाने को तैयार है। वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों 13 व 14 दिसंबर को सीतामढ़ी ब्रांड पूरे देश में जलवा बिखेरेगा। कृषि विभाग की ओर से इसकी तैयारी भी शुरू कर दी गई है। बस इंतजार है उच्चाधिकारियों की अनुमति की। जिले से औषधीय की खेती करने वाले 100 किसानों के अलावा दो एफटीओ (फार्मर प्रोड्यूसर आर्गनाइजेशन) भी शामिल किए जाएंगे।

शासन स्तर से किसानों को बढ़ावा देने के लिए तमाम योजनाएं संचालित की जा रही है। गंगा तटवर्ती गांवों में खेती कराने की योजना प्रस्तावित है। उद्देश्य है कि इससे जहां औषधीय खेती को बढ़ावा मिलेगा तो इसके जरिए किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी और उनकी आर्थिक स्थित सुदृढ़ होगी। योजना के तहत तटवर्ती 47 गांवों में किसानों ने रूचि दिखाई है। 250 एकड़ में लेमन ग्रास सहित तुलसी व खस की खेती शुरू कर दी गई है। ऐसे में वाराणसी में प्रस्तावित प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में किसानों की सहभागिता मायने रखेगी। औषधीय खेती से जुड़े किसानों में इसे लेकर उत्साह दिख रहा है।

उप कृषि निदेशक अरबिद कुमार सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री के वाराणसी कार्यक्रम को लेकर दो एफटीओ और 100 किसानों को प्रतिभाग कराने का प्रस्ताव मिला है। कार्यक्रम स्थल पर ही दो स्टाल की मांग की गई है। किसानों की आधार कार्ड के साथ ही सूची तैयार की जा रही है। बताया कि अभी यह निश्चित नहीं हो सका है कि उन्हें दो दिवसीय कार्यक्रम के किस दिन उपस्थित रहना है।

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क्या है सीतामढ़ी ब्रांड

कृषि विभाग की ओर से अपनी पहचान बनाने के लिए औषधीय और अन्य उत्पादों का नाम सीतामढ़ी ब्रांड रखा गया है। उप कृषि निदेशक ने बताया कि प्रधानमंत्री के सामने औषधीय खेती से तैयार उत्पाद को सीतामढ़ी ब्रांड के नाम से ही प्रस्तुत किया जाएगा।

Edited By: Jagran