जान से मारने की धमकी मामले में पूर्व विधायक विजय मिश्र समेत छह की सजा निरस्त, 2002 का मामला
एमपी/एमएलए सेशन कोर्ट ने पूर्व विधायक विजय मिश्र समेत छह लोगों को जान से मारने की धमकी के मामले में मिली दो साल की सजा को रद्द कर दिया है।

जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर (भदोही)। एमपी एमएलए सेशन कोर्ट की न्यायाधीश पुष्पा सिंह ने गुरुवार को 2002 में न्यायालय में पेशी पर आने के दौरान पूर्व सांसद गाेरखनाथ पांडेय के भतीजे रामकृष्ण को जान से मारने की धमकी के मामले में पूर्व विधायक विजय मिश्र, डीघ ब्लाक प्रमुख मनीष मिश्र समेत छह लोगों को की दो साल की सजा को निरस्त कर दिया।
इस आरोप में सभी छह लोगों को न्यायालय से दो-दो साल की सजा मिली थी। मामले में पूर्व विधायक, उसका भतीजा मनीष मिश्र, मनोज मिश्र उर्फ लाला, गुलाब शंकर, रिश्तेदार कृष्णमोहन तिवारी, आद्या प्रसाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
2002 के विधानसभा चुनाव में ज्ञानपुर विस क्षेत्र से तत्कालीन विधायक गोरखनाथ पांडेय भाजपा और विजय मिश्र सपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े थे। मतदान में धांधली की शिकायत पर कोइरौना क्षेत्र के मदनपुरा बूथ पर पुनर्मतदान हुआ। मतदान के दौरान गोरखनाथ के भाई त्रंयबकेश्वर और रामेश्वर के अलावा पूर्व विधायक विजय मिश्र, उनका भतीजा मनीष भी मौजूद था।
वहां मतदान के समय दोनों पक्षों के बीच मारपीट हो गई। इसमें विजय मिश्र और मनीष ने रामेश्वर पांडेय और त्रंयबकेश्वर पर गोली चला दी थी। इसमें दोनोंं भाई घायल हो गए। इसमें त्रंयबकेश्वर तो बच गए, लेकिन रामेश्वर पांडेय की मौत हो गई थी।
इस पर गोरखनाथ पांडेय के भतीजे रामकृष्ण ने विजय व मनीष के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मामले में पूर्व विधायक छह जून 2002 को पेशी पर आए थे। इस दौरान रामकृष्ण ने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक समेत छह लोगाें ने उसे जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
मामले में न्यायालय ने फरवरी 2025 में सभी छह आरोपितों को दो-दो साल की सजा सुनाई। पूर्व विधायक ने अपने अधिवक्ता हंसाराम शुक्ल, आनंद शुक्ल के माध्यम से एमपीएमएलए सेशन कोर्ट में सजा के खिलाफ अपील दाखिल की। गुरुवार को बहस के बाद न्यायाधीश ने सभी आरोपितों की सजा निरस्त कर दी।
