साड़ी की तरह कालीन उद्योग को मिले सस्ती बिजली, तो हो बेड़ा पार

जागरण संवाददाता, भदोही : वाराणसी के साड़ी उद्योग की तर्ज पर कालीन उद्योग को रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराने की मांग को सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया। जबकि ऊर्जा प्रबंधन से हरी झंडी मिलने के बाद छह माह पहले जिलाधिकारी की अध्यक्षता में रिवैम्प डिस्ट्रिब्यूशन सेंटर स्कीम के तहत हुई बैठक के दौरान निर्यातकों ने यह मामला उठाया था। इस पर जनप्रतिनिधियों ने हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाते हुए प्रस्ताव बनाकर भेजने की बात कही थी। अखिल भारतीय कालीन निर्माता (एकमा) प्रस्ताव तैयार कर विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक को प्रेषित कर दिया लेकिन अब तक सकारात्मक परिणाम नहीं आया है। निर्यातकों का कहना है कि लघु उद्योगों के विकास को लेकर सरकार की सकारात्मक मंशा को देखते हुए उद्योग हित में मांग उठाई गई थी।

करीब चार हजार करोड की विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले भदोही जनपद में बिजली आपूर्ति की हालत बेहद खराब है। रोस्टर के अनुसार 20 घंटे आपूर्ति का प्रविधान है लेकिन 10 से 15 घंटे बिजली मिलना मुश्किल हो गया है। इसके कारण विद्युत आधारित कामकाज प्रभावित हो रहा है। कटौती होने पर लोग जनरेटर चलाकर काम करने को विवश हो रहे हैं। इससे उत्पादन खर्च में वृद्धि हो रही है। भदोही को औद्योगिक बिजली उपलब्ध कराने की मांग लंबे समय से की जा रही है लेकिन जनप्रतिनिधियों का सहयोग न मिलने के कारण सरकार द्वारा मांग पर गौर नहीं किया जा रहा है।

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ऊर्जा मंत्री को भेजा गया है प्रस्ताव : भदोही में हैंडलूम कालीन उत्पादन बड़ी संख्या में होने लगा है। ऐसे में वाराणसी के साड़ी (पावरलूम) व्यवसायियों की तरह हैंडलूम कालीन उत्पादकों को भी रियायती दर पर बिजली मिलनी चाहिए। लखनऊ में आयोजित बैठक में ऊर्जा प्रबंधन के सामने उठाई गई थी। प्रबंधन द्वारा इस संबंध में प्रस्ताव मांगा गया था। एकमा ने प्रस्ताव तैयार कर ऊर्जा मंत्री सहित विभाग के प्रबंध निदेशक को भेजा गया है लेकिन अब तक सकारात्मक परिणाम देखने को नहीं मिला। जल्द ही एकमा द्वारा रिमाइंडर कराया जाएगा।

-असलम महबूब, मानद सचिव, अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा)

Edited By: Jagran