एयरपोर्ट जैसी चमचमाती सुविधाओं से लैस होंगे UP के 49 बस स्टेशन, देखें आपके शहर का नाम है या नहीं
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम दूसरे चरण में 49 रोडवेज बस स्टेशनों को पीपीपी मॉडल पर विकसित कर रहा ...और पढ़ें

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HighLights
49 रोडवेज बस स्टेशन पीपीपी मॉडल पर विकसित होंगे।
यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, स्वरूप बदलेगा।
परिवहन निगम की आय बढ़ाने के अवसर पैदा होंगे।
महेंद्र कुमार त्रिपाठी, बस्ती। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने दूसरे चरण में प्रदेश के 39 जनपदों के 49 रोडवेज बस स्टेशनों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) माडल पर विकसित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसमें बस्ती के अलावा देवरिया, सोनौली-निचलौल (महराजगंज), बेल्थरा रोड, रसड़ा (बलिया), ओल्ड अयोध्या बस स्टेशन और आजमगढ़ के तरवां समेत कई बस स्टेशन और डिपो कार्यशालाएं शामिल हैं। इनके विकसित होने से यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलने के साथ परिवहन निगम के लिए आय बढ़ाने के अवसर भी पैदा होंगे।
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम मुख्यालय, लखनऊ के प्रधान प्रबंधक (विपणन) अंकुर विकास ने 17 सितंबर को सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को पत्र भेजकर दूसरे चरण में पीपीपी माडल के लिए चयनित फर्म को बस स्टेशन हस्तगत किए जाने की स्थिति की रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही कोरियर-पार्सल सेवा की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यालय ने क्षेत्रीय अधिकारियों से यह जानकारी मांगी है कि चयनित फर्म को संबंधित बस स्टेशन हस्तगत किया जा चुका है अथवा नहीं। इसके अलावा मेसर्स एवीजी लाजिस्टिक्स की ओर से कोरियर-पार्सल सेवा वर्तमान में संचालित की जा रही है अथवा नहीं, यह भी बताना होगा। यदि बस स्टेशन निर्माणाधीन होने के कारण कोरियर-पार्सल सेवा प्रभावित हुई है तो इसकी तिथि या माह की जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।
निर्माण अवधि में कोरियर-पार्सल सेवा बाधित न हो, इसके लिए संबंधित फर्म को वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया गया है या नहीं, इसकी सूचना भी मुख्यालय ने मांगी है। इससे बस स्टेशन के निर्माण के दौरान यात्रियों और कारोबारियों को पार्सल सेवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी।

बस्ती रोडवेज। जागरण
बदल जाएगा बस स्टेशन का स्वरूप
इन 49 बस स्टेशनों को पीपीपी माडल पर विकसित किए जाने के बाद इसका स्वरूप बदलने के साथ यात्री सुविधाओं में विस्तार होगा। बेहतर यात्री प्रतीक्षालय, बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश, पार्किंग और खानपान जैसी सुविधाएं विकसित होने से यात्रियों को राहत मिलेगी। यात्रियों के लिए स्टेशन पर अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक माहौल उपलब्ध कराया जा सकेगा।
यात्री सुविधाओं के विस्तार का लाभ परिवहन निगम को मिलेगा। बस स्टेशन परिसर में व्यवस्थित व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने से आय के स्रोत बढ़ेंगे। पार्किंग, खानपान और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से मिलने वाले राजस्व से निगम की आय में वृद्धि की संभावना है।
इन बस स्टेशनों और परिसरों का होगा विकास
दूसरे चरण में बस्ती, देवरिया, ओल्ड अयोध्या, सोनौली,निचलौल, बेल्थरा रोड, रसड़ा, शिकोहाबाद, गढ़, लोनी, गोंडा डिपो कार्यशाला, हरदोई, हाथरस, जौनपुर, मछलीशहर, बादशाहपुर, मातनहेल, सराय अंकिल, गोता, कैसरबाग, जानकीपुरम, विंध्याचल, मुरादाबाद पीतलनगरी, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, कुंडा, रामपुर, भिनगा, नैमिषारण्य, सिधौली, राबर्ट्सगंज, जगदीशपुर, उन्नाव, काशी (गोलगड्डा ), चंदौली, बलरामपुर, हैदरगढ़, बदायूं, बुलंदशहर, पुराना खुर्जा , नटहौर , अकबरपुर डिपो, बदायूं, झांसी नई भूमि, माती कानपुर देहात, गोला लखीमपुर, फाउंड्री नगर आगरा,और एटा , नोएडा डिपो, गढ़ गाजियाबाद,समेत 49 बस स्टेशन व परिसर शामिल हैं।
पहले चरण में 23 बस स्टेशन थे शामिल
परिवहन निगम ने पीपीपी मॉडल पर बस स्टेशनों के कायाकल्प की शुरुआत पहले चरण में 23 बस स्टेशनों से की थी। ये स्टेशन प्रदेश के 16 जिलों में चयनित किए गए थे। इनमें गोरखपुर, वाराणसी कैंट, प्रयागराज सिविल लाइंस, कानपुर झकरकटी, लखनऊ के चारबाग व विभूतिखंड, आगरा फोर्ट समेत अन्य प्रमुख बस स्टेशन शामिल हैं। इसके बाद अब दूसरे चरण में 49 बस स्टेशनों को पीपीपी माडल पर विकसित करने की प्रक्रिया चल रही है।
