जागरण संवाददाता, बस्ती : सड़क हादसे में जान गंवा चुके दो प्रवासी मजदूरों का शव पांच दिन से मर्चरी में महज इसलिए रखा गया है कि कोरोना जांच की रिपोर्ट नहीं मिल पाई है। रिपोर्ट न मिलने से परिजनों को शव सुपुर्द नहीं किया जा रहा है। परिजन बेहाल हैं।

लापरवाही का आलम यह है कि हादसे में मृतक दोनों मजदूरों की कोरोना जांच रिपोर्ट पांच दिन बाद भी प्रशासन के जिम्मेदार नहीं मंगा सके। हरियाणा के फिरोजाबाद से बिहार के वैशाली जा रहे चार प्रवासी मजदूरों के कार का एक्सीडेंट 18 मई को कप्तानगंज थाना क्षेत्र के गोटवा में हाईवे पर हो गया। इलाज के दौरान वकीलराम, लालबाबू राम की मौत हो गई थी। शव को जिला अस्पताल के मर्चरी में रेफ्रिजरेटर में रखवा कोरोना जांच के लिए सैंपल लिया गया। जब परिजन शव लेने बस्ती आए तो उन्हें रिपोर्ट न आने का हवाला देकर शव देने से मना कर दिया गया। परिजन राजीव कुमार ने जिलाधिकारी बस्ती को पत्र लिखकर कहा कि पांच दिन बीत गए शव नहीं दे रहे हैं।

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दोहरी व्यवस्था :

दोहरी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे है। शुक्रवार को सेहुड़ा के अजय कुमार पांडेय की मौत हो गई थी। कोरोना जांच के लिए सैंपल लिया गया। रिपोर्ट नहीं आई, लेकिन शव परिजनों को सौंप दिया गया। वहीं बिहार के दोनों मजदूरों का शव रिपोर्ट के फेर में पांच दिन से मर्चरी में फंसा हुआ है।

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कोरोना जांच के लिए यदि सैंपल लिया गया हैं तो बिना रिपोर्ट आए शव नहीं दिया जा सकता। रिपोर्ट में विलंब क्यों हो रहा है, बीआरडी मेडिकल कालेज से बात करेंगे। सेहुड़ा कला गांव के मृतक का सैंपल लिया गया था। बिना रिपोर्ट के शव कैसे सौंप दिया गया, इस बाबत सीएमओ से जानकारी ली जाएगी।

आशुतोष निरंजन, जिलाधिकारी

Posted By: Jagran

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