बस्ती: बीपीएल सूची में हेराफेरी कर इंदिरा आवास आवंटन में घोटाले के आरोपी प्रधान सेक्रेटरी सहित 13 लाभार्थियों के विरुद्ध मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शैला ने मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से जांच कराने के बाद न्यायालय ने थानाध्यक्ष लालगंज को विवेचना की जिम्मेदारी सौंपी है। लालगंज थानाक्षेत्र के बैसियाकला निवासी संजय पुत्र जवाहिर ने गांव के 13 लाभार्थियों पर अपात्रता का आरोप लगाते हुए सीएजेएम की अदालत में परिवाद दाखिल किया। जिसमें कहा कि गांव के प्रधान फूलचंद्र यादव, ग्राम पंचायत अधिकारी सतीश चंद्र शुक्ल व कुदरहा ब्लाक के अन्य कर्मचारियों ने मिलकर इंदिरा आवास का घोटाला किया है। पीड़ित द्वारा मुकदमा दाखिल करने पर अदालत ने मुख्य विकास अधिकारी को पत्र प्रेषित करके मामले की प्राथमिक जांच कराने का अनुरोध किया था। मुख्य विकास अधिकारी ने खंड विकास अधिकारी कुदरहा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी। जांच के उपरांत खंड विकास अधिकार द्वारा वर्ष 2002 से लेकर 2007 के बीपीएल परिवारों की सूची अदालत में दाखिल किया। पीड़ित द्वारा अपने शपथ पत्र के साथ भी एक बीपीएल सूची दाखिल किया था। न्यायालय ने दोनों सूची का मिलान किया। तो उसमें भिन्नता पाई गई। बीपीएल सूची के क्रमांक के अनुसार जहां पात्रों का नाम होना चाहिए था। उसी क्रमांक पर प्रधान व सेक्रेटरी ने सरकारी धन का गबन करने की नियत से अपने मददगारों का नाम डाल दिया। परिवादी द्वारा जिन लोगों को अपात्र दर्शाया गया। उसमें मिथलेश पत्नी शशिधर, कांति पत्नी लक्ष्मी नरायन, सुशीला पत्नी राम प्रकाश, नेहा पुत्री राम सुरेश, अजय पुत्र राम सुरेश, विजय कुमार पुत्र राघव राम, लवकुश पुत्र परमात्मा, ¨वदु पत्नी लाल बिहारी, जग्गे लाल पुत्र झपसी, अवधेश पुत्र राम दयाल, इंद्रराज पुत्र हरीप्रसाद, पूनम पत्नी सुजीत कुमार व अभय पुत्र रामशंकर का नाम शामिल है। सीजेएम ने माना कि पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उपरोक्त सभी लोगों द्वारा इंदिरा आवास घोटाले का अपराध किया जाना प्रतीत होता है। ऐसी परिस्थिति में मुकदमा दर्ज कराकर पुलिस के जरिए निष्पक्ष जांच कराया जाना उचित होगा। न्यायालय ने थानाध्यक्ष लालगंज को अविलंब मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना करने को कहा है।

Posted By: Jagran