जागरण विमर्श: विकास पर मंथन, बस्ती की पहचान बने काष्ठ शिल्प और सिरका
जागरण विमर्श में 'विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित बस्ती' विषय पर मंथन हुआ, जिसमें उद्योग, परिवहन, चिकित्सा और पर्यटन के विकास पर जोर दिया गया।

बस्ती में हुए विकास कार्यों के साथ भविष्य की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

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जागरण संवाददाता, बस्ती। जागरण विमर्श के तहत 'विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित बस्ती' विषय पर गुरुवार को आयोजित प्रथम सत्र में जिले के विकास की संभावनाओं पर मंथन हुआ। उद्योग एवं आधारभूत संरचना पर केंद्रित चर्चा में बस्ती में हुए विकास कार्यों के साथ भविष्य की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
वक्ताओं ने उद्योग, परिवहन, चिकित्सा और पर्यटन को गति देने के साथ स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया। चर्चा का निष्कर्ष रहा कि उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा मिलने से बस्ती के विकास को नई दिशा मिल सकती है। चर्चा में बस्ती की औद्योगिक पहचान का मुद्दा प्रमुखता से उठा। हरैया विस क्षेत्र के विधायक अजय सिंह ने कहा कि आजादी के बाद जिले में कई चीनी मिलें स्थापित हुईं, लेकिन बाद में इनमें से कई बंद हो गईं।
वर्तमान सरकार ने मुंडेरवा चीनी मिल को दोबारा शुरू कराया। जिले में मेडिकल कालेज, इंजीनियरिंग कालेज और अटल आवासीय विद्यालय जैसी संस्थाएं शुरू हुई हैं। औद्योगिक क्षेत्र में भी लगातार काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि काष्ठ शिल्प और सिरका बस्ती की पहचान बन रहे हैं। बाहर से आने वाले लोग भी स्थानीय उत्पाद खरीदते हैं।
इनके लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में और प्रयास जरूरी हैं। उद्यमी सुभाष शुक्ल ने चिकित्सा आधारित उद्योगों की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि औषधि निर्माण के साथ मेडिकल उपकरणों का उत्पादन भी स्थानीय स्तर पर शुरू होना चाहिए। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और बस्ती को चिकित्सा आधारित उद्योगों का केंद्र बनाया जा सकेगा। परिवहन क्षेत्र में हुए बदलाव का उल्लेख करते हुए उद्यमी अखिलेश दुबे ने कहा कि गांव गांव तक सड़कों के पहुंचने से आवागमन की स्थिति सुधरी है।
वाहन कंपनियों ने अपनी शाखाएं खोली हैं और बस सेवाओं का विस्तार हुआ है। सीएनजी व विद्युत वाहनों की उपलब्धता भी बढ़ी है। 30-40 नए मार्गों पर छोटी गाड़ियां चलाने की योजना में बस्ती को भी शामिल किया गया है। उद्यमी सिद्धार्थ शंकर मिश्र ने कहा कि बस्ती में चिकित्सक और दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े उत्पादों का निर्माण नहीं होता। औषधि निर्माण की व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है। दिन की चिकित्सा व्यवस्था ठीक है, लेकिन रात में इसमें और सुधार की आवश्यकता है।
उन्होंने बंद चीनी मिलों को दोबारा शुरू कराने तथा सड़क और परिवहन व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि बस्ती में विद्युत वाहनों के लिए चार्जिंग केंद्र हैं, लेकिन इनकी संख्या बढ़नी चाहिए। पर्यटन की संभावनाओं पर विधायक अजय सिंह ने मखौड़ा, श्रृंगीनारी और रामरेखा जैसे धार्मिक स्थलों को बस्ती की बड़ी धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में इन स्थलों के विकास पर काम हुआ है। धार्मिक स्थलों के आसपास हरित गलियारा विकसित किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों को इन स्थलों के महत्व से दैनिक जागरण आगरग विमर्श परिचित कराने के साथ पर्यटन से जोड़ने की जरूरत है। सत्र में गौर ब्लाक के करीब 100 एकड़ क्षेत्रफल वाले ताल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का सुझाव संतोष शुक्ल ने दिया। विधायक ने कहा कि बस्ती में ऐसे कई तालाब हैं। दीपमाला भी महत्वपूर्ण स्थल है।
तालाबों के सुंदरीकरण का मुद्दा सरकार के समक्ष रखा जाएगा। मिट्टी लदे डंपरों की ऊंचाई कम कराने का सुझाव भी आया। शैलेन्द्र पांडेय की मांग पर विधायक ने नियमों का पालन कराने का आश्वासन दिया। सत्र का संचालन योगेश शुक्ल ने किया। चर्चा में उद्योग, चिकित्सा, परिवहन और पर्यटन को साथ लेकर बस्ती के समग्र विकास की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया गया।
