बस्ती: बस्ती-लखनऊ फोरलेन खतरों का सफर बनता जा रहा है। सुरक्षा के लिए लगे संकेतक झाड़ियों में खो गए हैं और जगह-जगह रेलिग टूट गई है। इतना ही नहीं कई जगह पटरियों पर दुकानें सज गई हैं। इस फोरलेन पर सुरक्षित और सुविधाजनक सफर की जिम्मेदारी गोरखपुर-अयोध्या टोल्स प्राइवेट लिमिटेड की है, लेकिन यह कंपनी वाहनों से महज टोल वसूल करने तक सिमट कर रह गई है। कंपनी सुविधाओें व मानकों की अनदेखी कर रही है और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) उदासीन बना हुआ है।

कांटे से लेकर घघौवा तक 70 किमी फोरलेन पर सड़क की पटरियों पर लगे सुरक्षा के संकेतक झाड़ियों में खो गए हैं। पटरियों पर लटकी पेड़ की डालियां खतरे को दावत दे रही हैं। झाड़ियों से ढके संकेतक खासतौर से रात में सुरक्षित यात्रा में बाधक बन गए हैं। बेसहारा पशुओं की धमाचौकड़ी भी कम नहीं है। मूड़घाट में बालू मंडी और कबाड़ की दुकानें पहले से ही चल रही हैं। अब पटरियों पर कब्जा कर दुकानें भी खोली जाने लगीं हैं।

बस्ती जिले में सर्वाधिक वाहन हादसे फोरलेन पर ही हो रहे हैं। इसमें आए दिन किसी न किसी की जान जा रही है, लेकिन टोल कंपनी इससे बेपरवाह है। पुलिस और परिवहन विभाग के अफसर एनएचएआइ का मसला बता पल्ला झाड़ लेते हैं जबकि आए दिन हादसों से कानून व्यवस्था प्रभावित होने का भी खतरा बना रहता है। बुधवार को परसा हज्जाम में फोरलेन पर बारिश और हवा के चलते पेड़ उखड़कर गिर गया, जिससे एक पटरी पर एक घंटे से अधिक समय तक आवागमन बाधित रहा। संयोग ठीक था कि कोई वाहन उसकी चपेट में नहीं आया। सेफ्टी मैनेजर श्याम अवतार शर्मा ने बताया कि पेड़ को हटाने में तत्परता बरती गई और जल्द ही आवागमन बहाल कर दिया गया।

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फोरलेन पर सुरक्षित यात्रा के लिए सफाई से लेकर गड्ढों को भरने का कार्य चल रहा है। रही बात पटरी पर अतिक्रमण की तो अब तक 40 लोगों को नोटिस दिया गया है। जल्द ही अभियान चलाकर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

केपी सिंह, टीम लीडर-एनएचएआइ

Edited By: Jagran