बस्ती:गणेश पूजा ,विश्वकर्मा पूजा ,दुर्गा पूजा और लक्ष्मी पूजा के अवसर पर विभिन्न पंडालों में जो प्रतिमाएं सजाई जाती हैं उनको बनाने का काम शुरू हो गया है। वर्तमान समय में गणेशोत्व की तैयारी शुरू हो गई है। मुंडेरवा ,बनकटी ,महादेवा और जिगिना में पांच माह की कड़ी मेहनत से इन प्रतिमाओं को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के रानाघाट कस्बे के पांच हुनरमंद मूर्तिकार तैयार कर रहे हैं। इनका हुनर ऐसा है कि इनकी मूर्तियां हाथों -हाथ बिक जाती हैं। मुंडेरवा कस्बे से 500 मीटर पूरब बस्ती कांटे -मार्ग के किनारे एक अहाते में कई वर्ष से पश्चिम बंगाल के मूर्तिकारों का यह दल होली समाप्त होते ही यहां आ जाता है। पश्चिम बंगाल रानाघाट के बादल पाल ,सुनील पाल ,विपुल पाल , गौतम पाल और मिलन विश्वास मूर्तियों को गढ़ने का काम करते हैं। सभी का काम बंटा हुआ है। सुनील पाल ढांचा तैयार करते हैं। गौतम पाल मिट्टी तैयार करते है और मिलन विश्वास पुआल के ढांचे पर तीन बार मिट्टी की परत चढाते हैं। विपुल पाल चेहरा तैयार करते हैं। इसके बाद सभी मूर्तियों की पेंटिग की जाती है। टीम लीडर बादल पाल कलाकारों के रहने, खाने और सामग्री का प्रबंध करते हैं। इनमें से चार लोगों की शिक्षा सिर्फ कक्षा 4 तक की है। सुनील निरक्षर हैं। इन मूर्तिकारों ने यह कला देख कर सीखी है। गौतम पाल बताते हैं कि मुंडेरवा, महादेवा,बनकटी ,कुदरहा और जिगिना में दर्जन भर गणेश प्रतिमाएं, 250, दुर्गा प्रतिमाएं तथा 100 से अधिक प्रतिमाएं लक्ष्मी पूजा के अवसर पर तैयार की जाती हैं। प्रतिमाओं के एक सेट की कीमत 4 हजार रुपये से 20 हजार रुपये तक होती है। नवंबर तक यह लोग यहां रहते हैं उसके बाद अपने घर लौट जाते हैं।

Posted By: Jagran