जागरण संवाददाता, बस्ती : श्री बाबा झुंगीनाथ धाम में चल रहे सात दिवसीय श्रीराम महायज्ञ, श्रीराम कथा में व्यासपीठ से श्रीराम कथा को विस्तार देते हुए मार्कंडेय जी महाराज ने कहा कि भक्ति के मार्ग में अहंकार का कोई स्थान नहीं है। भक्त का जिस रूप में समर्पण होगा उसे परमात्मा की छवि उसी अनुरूप दिखाई पड़ेगी। जीवन के जो चारों घाट और दिशाएं हैं उसमें श्रीराम कथा की मानस गंगा प्रवाहित है। ज्ञान गंगा, भक्ति और उपासना की त्रिवेणी गंगा, यमुना, सरस्वती हमारे मानस को नवीन दृष्टि देती हैं। कहा कि कथा की सार्थकर्ता है कि जीव की व्यथा दूर हो। मानस में संसार का ऐसा कोई प्रश्न नही जिसका समुचित उत्तर निहित न हो। प्रयागराज और नदियों की महिमा का वर्णन करते हुये महात्मा जी ने कहा कि श्रीराम कथा से जीव सुधरता है और कुविचार के स्थान पर सुविचार का जन्म होता है। समय, सम्पत्ति और शक्ति का जो सदुपयोग करे वह देवता और दुरूपयोग करने वाला दैत्य है। संतोष शरण जी महाराज ने कहा कि श्रीरामचंद्र की मर्यादा का पालन करने से मन का रावण मरता है। जिसके मन में संसार विषय आते ही नहीं उसके लिये मुक्ति सुलभ है। जब बुद्धि में परमात्मा का वास होता है तो पूर्ण शांति मिलती है। इसके लिए मन पर नियंत्रण आवश्यक है। विविध प्रसंगों से कथा को जोड़ते हुये महात्मा जी ने कहा कि रघुनाथ का अवतार राक्षसों के बध के लिए नहीं वरन मनुष्यों को मानव धर्म सिखाने के लिये हुआ। श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और कृष्ण पुष्टि पुरुषोत्तम। श्रीरामचंद्र मर्यादा है तो श्रीकृष्ण प्रेम। मर्यादा और प्रेम को जीवन में स्थान मिलेगा तो जीवन सुखी होगा। मन के चंचलता की व्याख्या करते हुये महात्मा ने कहा कि सेवा में धन नहीं मन ही मुख्य है। सेवा का संबंध मन से है। परमात्मा सत्कर्म में सहायक होते हैं। ईश्वर की धर्म मर्यादा का उल्लंघन करने पर भक्ति सफल नहीं हो सकती। संयोजक पं. धु्रवचंद्र पाठक ने विधि विधान से आचार्यगणों का वंदन किया। मुख्य यजमान माता बदल पाठक, सीमा पाठक, गंगाराम चौधरी, गुड्डू तिवारी, शीतला जी गोसाई, रामकेवल यादव, राजेंद्र यादव, अनिल पाठक, रामनिहोर चौधरी, शुभम पाठक, बब्बू तिवारी, विनोद पाण्डेय, बाबा जय प्रकाश दास आदि रहे। यज्ञ नगर मंदिर में आयोजित हुआ खिचड़ी सहभोज

जासं. हर्रैया : विश्व हिदू परिषद ने शनिवार को यज्ञ नगर मंदिर परिसर में सामाजिक समरसता सहभोज का आयोजन किया। अध्यक्षता परिषद के जिलाध्यक्ष दिनेश मिश्र ने की। मकर संक्रांति तथा सनातन संस्कृति के बारे में लोगों को जानकारी दी। कहा सनातन धर्म में जाति-धर्म, ऊंच-नीच का भेदभाव नहीं था। यह मुगलों तथा अंग्रेजों के द्वारा हिदू समाज को तोड़ने के लिए एक बड़ा षड्यंत्र था। समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में बांधने का प्रयास परिषद कर रहा है। समाज के सभी वर्गों से आए हुए लोगों ने खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण किया। अर्जुन वर्मा, सुधांशु, देवांश, भगवान दास, भोला नाथ, पप्पू, रामजनत, शिवरतन, गिरधारी लाल, हिमांशु, भागीरथी, नंदूराम, जग्गू कनौजिया, संतोष कनौजिया, हजारी लाल, नकुल वर्मा रहे।

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