जागरण संवाददाता, गायघाट, बस्ती : विकास खंड कुदरहा क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों के खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के तहत स्वेटर, जूता-मोजा, ड्रेस खरीदने के लिए खाते में 11 सौ रुपये भेजे जाने थे लेकिन अधिकांश अभिभावकों के खाते में यह रकम पहुंची ही नहीं। बच्चे बिना स्वेटर व जूता-मोजा के बच्चे स्कूल जा रहे हैं।

विकास क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय पांऊ, प्राथमिक विद्यालय बनहरा, कन्या प्राथमिक विद्यालय गायघाट, प्राथमिक विद्यालय गायघाट, प्राथमिक विद्यालय बैड़ारी एहतमाली, प्राथमिक विद्यालय गंगापुर सहित अधिकांश विद्यालयों में बच्चे बिना स्वेटर, जूता-मोजा व ड्रेस के स्कूल में पढ़ने आ रहे हैं। कंपोजिट विद्यालय पांऊ के प्रधानाध्यापक अजीत गुप्ता ने बताया कि डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के खाते में पैसा भेजा गया है। जिन अभिभावकों के खाते में यह रकम पहुंच गई है उन्हें हिदायत दी गई है कि वे बच्चे का स्वेटर जूता-मोजा व ड्रेस खरीद लें,नहीं तो एक दिसंबर से बच्चों का स्कूल में प्रवेश वर्जित कर दिया जाएगा।

दूसरी तरफ चर्चा है कुछ अभिभावकों के ही खाते में पैसा पहुंचा है, अधिकांश के खाते में यह रकम नहीं पहुंची है। मजबूरी में बच्चे बिना स्वेटर,जूता-मोजा व ड्रेस के स्कूल जाने को मजबूर हैं। अभिभावक दिनेश ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय पांऊ में एक बिटिया महक कक्षा एक में पढ़ती है। ठंड शुरू हो गया है लेकिन अभी तक खाते में पैसा नहीं आया है। कन्या प्राथमिक विद्यालय गायघाट के प्रधानाध्यापिका अनीता कौशल ने बताया कि 106 बच्चे नामांकित हैं जिनमें से 97 बच्चों का प्रेरणा पोर्टल पर पूरा डाटा अपलोड कर दिया गया है। डीबीटी पोर्टल पर अधिकांश अभिभावकों के खाते में भुगतान सफल दिखा रहा है। लेकिन अभिभावक विद्यालय पर आकर शिकायत कर रहे हैं कि खाते में पैसा अभी नहीं पहुंचा है। प्राथमिक विद्यालय बनहरा के सहायक अध्यापक अनुराग सिंह ने बताया कि विद्यालय में 37 बच्चे नामांकित हैं। जिसमें कुछ बच्चों के अभिभावक के खाते में पैसा पहुंच गया है और कुछ के खाते में पैसा नहीं पहुंचा है।

खंड शिक्षा अधिकारी कुदरहा ममता सिंह ने बताया कि ब्लाक क्षेत्र के सभी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के खातों में धनराशि भेजी जा रही है। अधिकांश के खाते में यह रकम पहुंच चुकी है। कुछ अभिभावकों के खाते में ही पहुंचना बाकी है।

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