यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 14, 2011 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
शिक्षकों का फूटा गुस्सा, सौंपा ज्ञापन

बस्ती: शिक्षकों की निरंतर उपेक्षा व सहमति प्राप्त मांगों के शासनादेश निर्गत न होने के विरोध में माध्यमिक शिक्षणेत्तर संघ का गुस्सा फूटा। बुधवार को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेत्तर संघ के बैनर तले जिला मुख्यालय प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
सामुहिक अवकाश पर रहते हुए कार्य बंद कर सरकार का असहयोग दर्शाया। इस दौरान जिला मंत्री दुर्गा प्रसाद दुबे, काशी राम कन्नौजिया, अशोक कुमार मौर्य, यशपाल यादव, रूपेश श्रीवास्तव, असर रजा, सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, धु्रव चन्द्र मिश्र सहित तमाम लोग उपस्थित थे। प्रदर्शन में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि बसपा सरकार कर्मचारी विरोधी है। कर्मचारी संघ के नेताओं और सरकार के सचिव के मध्य अनेक बार लिखित समझौता हुआ, परन्तु आज तक शासन द्वारा एक भी मांग निर्गत नहीं हुआ। बसपा शासन से अब कर्मचारियों और आम जनता का विश्वास समाप्त हो चुका है। संघ आगामी चुनाव में प्रत्याशियों का विरोध करेगा।
कहा कि योग्यताधारी शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की शिक्षक पद पर पदोन्नति के प्रकरण को शासन द्वारा माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को भेज कर लंबित रखने का प्रयास किया है। साथ ही उपर्जित अवकाश का नकदीकरण सेवानिवृत्त पर दिए जाने संबंधित पत्रावली वित्त विभाग में लंबित है। कर्मचारियों की मांगों की सहमति हो चुकी है। परन्तु निर्गत नहीं किया गया। बसपा शासन निरंकुश शासन है। सौंपे गए ज्ञापन में पांच प्रमुख मांग पर सरकार को गंभीरता दिखाने की बात कहीं गई है।
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