बस्ती : लेखपाल संघ के अनवरत आंदोलन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रशासन अब सीधे कार्रवाई पर उतर आया है। आंदोलनरत जिले के 35 लेखपाल अभी तक निलंबित किए जा चुके हैं। दो नए लेखपालों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई कर दी गई है। जबकि 382 लेखपालों को सेवा समाप्ति की नोटिस थमाई गई है। यह कार्रवाई दिनभर चर्चा का विषय बनी रही। दो दिन पहले ही यह अंदेशा हो गया था कि यदि सोमवार को आंदोलन समाप्त नहीं हुआ तो लेखपालों को कार्रवाई की जद में लाया जाएगा। जैसे ही कलेक्ट्रेट परिसर में आंदोलन शुरू हुआ। प्रशासन ने भी अपनी भृकुटी चढ़ा ली। डीएम डा. राजशेखर के निर्देश पर तहसीलवार लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई पत्र तैयार होने लगा। जनमानस के कार्य न करने के आरोप में निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई की गई। देरशाम जिलाधिकारी ने कार्रवाई की स्थिति से आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद को भी अवगत कराया। इसमें बताया गया कि दो नए लेखपालों की सेवा समाप्ति, 35 लोगों के निलंबन के अलावा 382 लेखपालों को सेवा समाप्ति की नोटिस थमाई गई है। यदि आंदोलन से वापस नहीं आए तो यह लेखपाल भी बर्खास्त किए जाएंगे। वहीं नो वर्क- नो पे की कार्रवाई की जद में 600 लेखपाल आ गए हैं। इनका वेतन रोका गया है। मुख्य राजस्व अधिकारी डा. आरडी पांडेय ने कहा कि नियम विरुद्ध आंदोलन किए जाने से जनमानस का कार्य तहसीलों में नहीं हो पा रहा है। लेखपाल आंदोलन से वापस नहीं आ रहे हैं इसलिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मंगलवार को 12 नए लेखपाल यदि काम पर वापस नहीं लौटे तो दोपहर बाद सभी को बर्खास्त कर दिया जाएगा।

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95 लेखपाल काम पर वापस लौटे

प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो जाने से लेखपालों का आंदोलन कमजोर होने लगा है। सोमवार को कार्रवाई के भय से आंदोलनकारी लेखपालों में भगदड़ मच गई। जिले के चारों तहसीलों में लेखपाल काम पर वापस लौटने लगे हैं। प्रशासन के अनुसार 95 लेखपाल कामकाज करने पर सहमति जताए हैं। वह अपने कार्य स्थल पर लौट आए हैं।

Posted By: Jagran

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