बस्ती: जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध न कराना जिले के तीन अधिकारियों पर भारी पड़ गया है। राज्य सूचना आयुक्त ने प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड लगा दिया है।

शिव शंकर पांडेय ने वर्ष 2011 में भूमि संरक्षण अधिकारी,भूमि विकास एवं जल संसाधन विभाग से कराए गए कार्यो के बारे में आरटीआई के तहत सूचनाएं मांगी। इसको लेकर वह विभाग के चक्कर लगाते रहे। सूचना नहीं मिली तो ,वह राज्य सूचना आयोग में पहुंच गए। सुनवाई के बाद भूमि संरक्षण अधिकारी को सूचना न देने का दोषी पाया गया है। इन पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगा दिया गया है।

-जिला विद्यालय निरीक्षक पर लगा जुर्माना: कपिल देव ने वर्ष 2012 में जिला विद्यालय निरीक्षक से जनता इंटर कालेज पोखरा बाजार में नियुक्ति से संबंधित तीन बिंदुओं पर सूचनाएं मागी। जन सूचना अधिकार के तहत मांगी गई सूचनाएं देने में पहले तो आनाकानी की गई,लेकिन जब मामला राज्य सूचना आयोग में पहुंच गया,तो आवेदक को अधूरी सूचनाएं दी गई।

राज्य सूचना आयुक्त ने सुनवाई के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक को सूचना न देने का दोषी पाया और उन पर 25 हजार रुपये अर्थदंड लगा दिया है। आदेश को अनुपालन के लिए प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा और मुख्य कोषाधिकारी को भेजा गया है।

अधिशासी अभियंता भी दंडित: आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना न देने का दोषी पाए जाने पर अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड-2 पर 25 हजार अर्थ दंड लगा दिया गया है।

विजय चंद सिंह ने पांच बिंदुओं पर सिंचाई विभाग द्वारा कराए गए कार्यो के बारे में सूचनाएं मागी। सूचना नहीं मिलने पर सिंह ने राज्य सूचना आयोग में अपील की। इसके लिए पहले नोटिस जारी की गई,लेकिन इसके बाद भी जब सूचना नहीं दी गई तो राज्य सूचना आयुक्त ने 25 हजार का अर्थदंड लगाने का आदेश जारी कर दिया। आयोग द्वारा पारित आदेश की प्रति जिलाधिकारी के पास अनुपालन के लिए भेजी गई है।

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