जेएनएन, बरेली : गांव और कस्बों में बुखार के पांव अफसर उखाड़ नहीं सके, अब नई मुश्किल हाजिर हो कई। रामगंगा नदी किनारे के 61 गांव भी बुखार की चपेट में आ गए हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने से किनारों से सटे गांव और खेतों में जलजमाव हो गया। इससे पनपे मच्छरों से बुखार फैलने लगा। अफसरों ने संक्रमण रोकने के लिए कोशिशें शुरू कर दीं। मंगलवार को सीडीओ ने इन प्रभावित गांवों की मैपिंग कराने के बाद पानी भरे मिले गड्ढों को सुखाने तथा वहां कीटनाशकों का छिड़काव कराने के निर्देश दिए हैं।

नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के गांव किनारे गड्ढों, खेतों में पानी भर गया है। खेतों में काम करने को पहुंचे गांव वाले मच्छरों की चपेट में आ रहे । गांव में संक्रमण से लोग बीमार होने लगे हैं। विकास विभाग ने खतरा बढ़ने से पहले ही बचाव के उपाय शुरू कर दिए। केवल इन्हीं गांवों के नहीं, बदायूं जिले से भी रामगंगा किनारे के सीमावर्ती गांवों में भी बुखार दस्तक देने लगा। वहां के नजदीकी गांवों को भी चिंहित करके मैपिंग कराई है।

डीएम ने ली बैठक, जलजमाव न होने देने के निर्देश

देर शाम विकास भवन में डीएम की अध्यक्षता में बैठक आयोजित हुई। डीएम ने इसमें सभी ग्राम पंचायत के अधिकारियों को तलब किया। उन्हें मैपिंग के अनुसार चिंहित गांवों में पानी से भरे गड्ढों में मिट्टी डालकर सुखाने के निर्देश दिए गए। इनमें जल जमाव न हो सके इसकी जवाबदेही तय की। वर्जन--

- बरसात के बाद रामगंगा से सटे खेत तथा गावों में जलजमाव से मच्छर पनप रहे हैं। जिले के साथ ही बदायूं के नजदीकी गांवों की भी मैपिंग कराई हे। गढ्डों में भरा पानी सुखाकर कीटनाशक छिड़काव के निर्देश दिए हैं।

-सत्येंद्र कुमार, सीडीओ।

Posted By: Jagran