बरेली, जेएनएन। सरकारी वेंटीलेटर के लिए स्टाफ की किल्लत होने से 18 वेंटीलेटर का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। जबकि कोविड मरीजों के लिए ऑक्सीजन और वेंटीलेटर ही सबसे बड़ा मुद्दा है। डीएम नितीश कुमार और जिला सर्विलासं अधिकारी रंजन गौतम ने इसपर मंथन किया। बदायूं और शाहजहांपुर के रिजर्व में रखे 40 वेंटीलेटरों को भी इस्तेमाल करने के लिए निजी मेडिकल कॉलेजों का सहारा लेने की तैयारी है। इसको लेकर डीएम मेडिकल कॉलेज के संचालकों से संपर्क कर रहे है।जिला अस्पताल में 18 वेंटीलेटर मौजूद है। संक्रमितों के इलाज के लिए वेंटीलेटर की आवश्यकता भी है। ऐसे में प्रशासन की रणनीति पर डीएम नितीश कुमार से बातचीत की गई। 

प्रश्न - वेंटीलेटर की कमी बताई जा रही है, जबकि 300 बेड में 18 वेंटीलेटर माैजूद हैंं।

उत्तर - वेंटीलेटर और इनवेसिव वेंटीलेटर दोनों मौजूद है। इनवेसिव वेंटीलेटर में मुंह या नाक के माध्यम से एयरपाइप शरीर में जाता है। जबकि वेंटीलेटर में मास्क के जरिए ऑक्सीजन दी जाती है। आइवी मोड की सबको जरूरत नहीं होती है। 18 वेंटीलेटर के लिए स्टाफ का प्रबंध करने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रश्न - स्टाफ प्रबंधन के लिए प्रशासन ने क्या कदम उठाए?

उत्तर - एसआरएमएस से संपर्क किया गया कि वह वेंटीलेटर ले सकते है, उनके पास स्टाफ नहीं है। रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज और राजश्री से भी संपर्क किया है। अभी उनका जवाब नहीं आया है।

प्रश्न - संक्रमण और गंभीर होने पर वेंटीलेटर के लिए रिजर्व व्यवस्था क्या है। मरीजाें को राहत कैसे दी जाएगी?

उत्तर - बदायूं और शाहजहांपुर से हमारे पास 40 अतिरिक्त वेंटीलेटर है। 300 बेड में हमारे पास स्टाफ है। फिजिशियन और पैरामेडिकल भी। हमारा पूरा प्रयास है कि कही कोई दिक्कत नहीं आने पाए।

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