कभी अपने विवादास्पद बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले भाजपा सांसद वरुण गांधी अब बदले-बदले से नजर आते हैं। अब हर बात को जहां नाप-तौल के बोलते हैं, वहीं उनमें पूरी गंभीरता भी दिखती है। कांग्रेस में जाने की चर्चाओं को सिरे से खारिज करते हुए वरुण कहते हैं-जिस दिन भाजपा छोडूंगा, उस दिन राजनीति ही छोड़ दूंगा।' पीलीभीत स्थित उनके आवास पर राज्य ब्यूरो प्रमुख अजय जायसवाल ने उनसे बातचीत की।

प्रश्न : सुल्तानपुर से फिर क्यों नहीं लड़े?  
उत्तर : कौन कहां से चुनाव लड़ेगा यह पार्टी हाईकमान पर छोड़ना चाहिए। मेरे लिए दोनों ही अपने घर हैं इसलिए कोई तकलीफ नहीं है।

प्रश्न : फिर भी पीलीभीत में वैसा विकास नहीं दिखता जैसा होना चाहिए?
उत्तर : देखिए, मैं अर्थशास्त्री भी हूं। विकास के उस माॅडल को मैं विनाश का माॅडल मानता हूं जो जगदीशपुर और कानपुर में देखने को मिलता है। बड़ी फैक्ट्रियां लगी, लेकिन नौकरी मिली 50-60 को। मैं विकेंद्रीकरण के माॅडल को बेहतर मानता हूं।

प्रश्न : आप बदले-बदले से दिख रहे हैं?  
उत्तर : मीडिया ही नायक और खलनायक बनाने का प्रयास करती है। मेरे ऊपर लगे झूठे केस में मैं बरी हुआ।

प्रश्न : पार्टी या वरिष्ठ नेताओं को लेकर किसी तरह की शिकवा-शिकायत?
उत्तर : मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूं। पार्टी ने मुझे और मेरी मां को अपार सम्मान दिया है।

प्रश्न : चुनावी सभाओं में आप मायावती और अखिलेश पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
उत्तर : मैं क्या गलत कह रहा हूं। जो है वह कहा। क्या मायावती टिकट नहीं बेचती। अखिलेश ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव के साथ क्या किया है, किसी से छिपा है क्या?

प्रश्न : नाम के साथ गांधी होने के संदेश का फायदा है या नुकसान?
उत्तर : मैंने अपनी मां से सीखा है कि ताकत बांटने से बढ़ती है, प्यार बांटने से बढ़ता है। नाम तभी जिंदा रहते हैं जब लोग दुआएं और आशीर्वाद पाते हैं।

प्रश्न : राहुल के साथ ही प्रियंका की सक्रियता का क्या असर देख रहे हैं ?
उत्तर : कोई असर नहीं दिखता। मोदी जी और भाजपा के सामने राहुल गांधी के लिए कोई स्पेस नहीं है। जब संगठनात्मक ढांचा ही न हो तो कोई क्या कर लेगा, वह फिर प्रियंका ही क्यों न हों?

चुनाव की विस्तृत जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें