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यूपी में घी की खुरचन से बनेगी उत्तराखंड की फेमस बाल मिठाई, IVRI के विज्ञानियों ने कराया पेटेंट

Published: Thu, 02 Apr 2026 03:19 PM (IST)

IVRI, बरेली के वैज्ञानिकों ने घी की खुरचन से उत्तराखंड की प्रसिद्ध बाल मिठाई का विकल्प तैयार किया है। इस ...और पढ़ें

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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हिमांशु अग्निहोत्री, बरेली। डेरियों या घरों में देसी घी बनाने के बाद बचे हुए अवशेष (घी की खुरचन या माइयर) का क्या करते हैं...? सामान्यता इसे पशुओं के चारे में मिलाया जाता है या फेंक दिया जाता है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आइवीआरआइ) के विज्ञानियों ने इसे बाल मिठाई का विकल्प बनाया है।

घी की इस खुरचन को वेस्ट टू वेल्थ (अपशिष्ट से संपदा) के तौर पर उपयोग किया जाएगा। इस पौष्टिक और स्वादिष्ट खाद्य का पेटेंट करा लिया गया है। इस तकनीक को बेचा जाएगा, फिर कंपनियां सामान तैयार कर बाजार में बिक्री कर सकेंगी। संस्थान में प्रतिदिन औसतन दो हजार लीटर दूध उत्पादन होता है। इसमें एक हजार लीटर की बिक्री होती है। शेष से विभिन्न उत्पाद बनाए जाते हैं। इसके लिए शोध का जिम्मा पशुधन उत्पादन तकनीक (एलपीटी) विभाग के पास है।

उत्तराखंड की बाल मिठाई के समान इसका स्वाद

विभाग की प्रधान विज्ञानी डा. गीता चौहान ने बताया कि घी की खुरचन पौष्टिक होती है। इसका भूरा रंग उत्तराखंड की प्रसिद्ध बाल मिठाई की तरह होता है। यहीं से विचार आया कि इससे बाल मिठाई बनाई जाए। इसके लिए घी की खुरचन को मशीन से सुखाकर पाउडर बनाया गया। खुरचन का 60 प्रतिशत हिस्सा एवं खोया (खोवा) का 40 प्रतिशत हिस्सा मिलाकर उसमें स्वादानुसार चीनी मिलाई गई। इसका स्वाद उत्तराखंड की बाल मिठाई के समान है।

पहले चरण में प्रयोग सफल होने के बाद इस उत्पाद को पैकेटबंद डिब्बे के तौर पर तैयार किया गया। घी की खुरचन और भूने गए खोये को मशीन के जरिये पाउडर में बदला। इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कुछ तरल मिलाए। इस तरह बाल मिठाई डिब्बाबंद पाउडर के रूप में तैयार की गई। यह चार-पांच महीने तक सुरक्षित रहती है।

डा. गीता ने बताया कि इस प्रयोग से डेरी संचालकों को आय के अतिरिक्त साधन मिल सकेंगे। अभी तक बाल मिठाई पूरी तरह खोया से तैयार होती है। इस तकनीक के बाद खोया की जरूरत सिर्फ 40 प्रतिशत होगी।

शेष 60 प्रतिशत हिस्सा घी की खुरचन का होगा। इसे तैयार करने में प्रयुक्त मशीन भी सस्ती है। संस्थान ने तकनीक का पेटेंट करा दिया है। अब इसे किसी कंपनी को बेचा जाएगा। इसके बाद डिब्बाबंद पाउडर बाजार में आएगा। इसमें पानी मिलाकर चंद मिनट में बाल मिठाई तैयार हो जाएगी।

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