बरेली, जेएनएन। UP Elections 2022 : बदायूं विधानसभा चुनाव में सदर विधानसभा सीट पर सपा का मुस्लिम कार्ड खेलना तय माना जा रहा है। बसपा से काजी रिजवान को लेकर आए धर्मेंद्र यादव ने खुद उनकी अखिलेश यादव से मुलाकात कराई थी। इस लिहाज से सदर सीट पर इन्हें टिकट के प्रबल दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। पिछले दो चुनावों में यहां से सपा का चेहरा रहे पूर्व दर्जा राज्यमंत्री आबिद रजा की पार्टी में वापसी के द्वार अभी तक नहीं खुल सके हैं। वह आजम खान के सहारे अब भी टिकट की आस लगाए हुए हैं। पार्टी का टिकट घोषित होने के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी कि चुनावी दंगल कौन लड़ेगा।

जिले में सपा की राजनीति पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव के इर्द-गिर्द ही घूमती है। पिछले विधानसभा चुनाव से पहले धर्मेंद्र यादव और आबिद रजा के बीच मतभेद चरम पर पहुंच गया था। उन्हें पार्टी से बाहर जाना पड़ा था, उसके बाद भी उन्हें टिकट मिला था, हालांकि 70,847 वोट मिलने के बाद भी हार गए थे, जबकि भाजपा के महेश गुप्ता 87,314 वोट पाकर चुनाव जीते थे, जो इस समय नगर विकास राज्यमंत्री हैं। 2012 के चुनाव में आबिद रजा 62,786 वोट पाकर सपा के टिकट पर निर्वाचित हुए थे।

तब भाजपा के महेश चंद्र गुप्ता को 47,373 वोट मिले थे। पिछले चुनाव में धर्मेंद्र यादव आबिद रजा को चुनाव लड़ाने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन आजम खान की बदौलत उन्हें टिकट मिल गया था। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो धर्मेंद्र यादव इस चुनाव में भी आबिद रजा को पार्टी में लाने के पक्ष में नहीं हैं। इसलिए वह रिजवान को लेकर खुद अखिलेश यादव से मिलवाने गए थे। सियासी गलियारे में अब भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग चर्चा यहां तक कर रहे हैं कि आबिद रजा के लिए आजम खान अड़ गए हैं, लेकिन कोई जिम्मेदार इस बात की पुष्टि नहीं कर रहा है।

आजम खान से आबिद रजा की नजदीकी जगजाहिर है, लेकिन इस समय वह खुद जेल में हैं, उनकी कितनी चलेगी कह पाना मुश्किल है। सदर सीट पर बसपा और कांग्रेस भी अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी हैं, इन हालातों में आबिद रजा के लिए ज्यादा विकल्प नहीं दिखाई दे रहे हैं। बहरहाल, सपा का टिकट घोषित होने के बाद ही समीकरण तय किए जा सकेंगे।

Edited By: Ravi Mishra