बरेली, जेएनएन । Unlock-1 Indian Railway News : आपातकाल में रुकी थी न ही युद्धकाल में थमी। कोरोना के कहर से पहिए थमे जरूर, लेकिन समय की मांग के अनुरूप देशवासियों की सेवा के लिए स्टेशन पर सावधान खड़ी थी। मैं भारत की जीवन रेखा, करने देश की सेवा, फिर से अपनों को अपनों से मिलाने, आज फिर से चल पड़ी हूं...। मैं रेल हूं। मैं जितनी पूर्व की हूं, उतनी ही पश्चिम की। जितनी उत्तर की, उतनी ही दक्षिण की। मैं जितनी वादियों-बहारोंकी हूं, उतनी ही रेगिस्तानों और पहाड़ों की। जितनी गरीबों की हूं, उतनी ही अमीरों की। मेरी एक बर्थ पर आंसू हैं तो दूसरी पर मुस्कान। सफर मेरा धर्म है और मर्म मेरी मंजिल। मैं अब अर्थ व्यवस्था का भी एक हिस्सा हूं। अगर ट्रेन बोल सकती तो शायद आज उसके शब्द कुछ ऐसे ही होते।

68 दिन एकांतवास में रहने के बाद मैं अपने मुसाफिरों को लेकर फिर से सफर के लिए निकल पड़ी हूं। मैं अपने यात्रियों से कहना चाहती हूं कि मुझ पर वैसा ही भरोसा रखिएगा, जैसे पहले रखते थे। आपका भरोसा मुझे नई गति प्रदान करेगा। वहीं बरेली जंक्शन से उत्तर रेलवे की बनकर चलने वाली नौ जोड़ी ट्रेनें और इज्जतनगर मंडल की 81 जोड़ी यात्री ट्रेनें अभी भी एक दूसरे का मुंह देखते हुए कह रही हैं कि अब नहीं सुहाता यह एकांतवास...। 22 मार्च से हमारे पहिए थमे हुए हैं। कहां हर रोज हम हजारों लोगों से मिलते थे और इतने दिनों से इस एकांत में रहना किसी दंड से कम नहीं। एक जून से बाकी ट्रेनें तो पटरी पर दौडऩे लगी पर हमें कब यह सुख मिलेगा, पता नहीं...। चौपुला वाङ्क्षशग लाइन पर उत्तर रेलवे जबकि इज्जतनगर मंडल के अलग-अलग स्टेशनों से चलने वाली यह ट्रेनें आज भी अपने चलने का इंतजार कर रहीं हैं।

एक नजर आंकड़ों पर...

- 2.5 करोड़ यात्री सामान्य दिनों में प्रतिदिन करते हैं यात्रा

- 7500 रेलवे स्टेशन हैं देश भर में

- 15000 से अधिक लोग रोजाना बरेली जंक्शन से करते हैं सफर

- 164 यात्री ट्रेनें जंक्शन से गुजरती हैं

- 160 यात्री ट्रेनों का जंक्शन पर होता है ठहराव

- 100 मालगाडिय़ों का भी होता है जंक्शन पर ठहराव

- 166 यात्री ट्रेनों का इज्जतनगर मंडल से होता है संचालन

- 01 मात्र अप-डाउन ट्रेन का अभी हो रहा संचालन

- 88 स्टेशन हैं इज्जतनगर रेलवे मंडल में

इज्जतनगर मंडल की अभी केवल एक जोड़ी नैनी जनशताब्दी ट्रेन को संचालित किया जा रहा है। रेलवे की ओर से जो आदेश मिलेंगे, उनका पालन कराया जाएगा। - राजेंद्र सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, इज्जतनगर मंडल

बरेली में भाई की सेना में पोस्टिंग है। 18 मार्च को परिवार सहित घूमने आया था। 31 मार्च को वापसी का टिकट था। लॉकडाउन में यहीं फंस गए। अब लखनऊ मेल से दिल्ली जा रहे हैं। - गोपी, जूनानगर, गुजरात

21 मार्च को परिवार सहित पीलीभीत में रिश्तेदारी में आए थे। लॉकडाउन में यही फंस गए। रिजर्वेशन भी कैंसिल कराना पड़ा। अब श्रमजीवी एक्सप्रेस से वापस गाजियाबाद जा रहे हैं। - विक्की, गाजियाबाद

Posted By: Ravi Mishra

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