बरेली, जेएनएन। शिक्षा का दान महादान। ये कहावत बहुत पुरानी है। इस कहावत को विपरीत परिस्थितियों में चार बोर्ड परीक्षार्थी और एक ग्यारहवीं का छात्र चरित्रार्थ कर रहे हैंं। सिर पर बोर्ड परीक्षाएं होने के बाद भी ये बच्चे परिषदीय स्कूल में पढ़ने वाले उन छात्रों की पढ़ाई को प्रभावित होने से बचा रहे हैं, जिनके पास आनलाइन पढ़ाई करने के लिए न तो स्मार्ट फोन है और न ही अन्य संसाधन।

संक्रमण के चलते 11 अप्रैल तक प्रदेश सरकार ने आठवीं तक के स्कूलों को बंद रखने के आदेश किए हैं। आगे भी अगर स्थिति बेहतर नहीं होती है तो स्कूल कब खुलेंगे कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसे में परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पढ़ रहा है। इसमें भी सबसे ज्यादा उन्हें जिनके पास आनलाइन पढ़ाई करने के लिए संसाधनों का अभाव है। इन नौनिहालों की पढ़ाई को प्रभावित होने सेे राेकने लिए ग्राम भुता में रहने वाले दसवीं कक्षा के विद्यार्थी सचिन, साधु, सुधा, सरिता और ग्यारहवीं कक्षा के प्रशांत खेवनहार बनकर बच्चों अपने घर पर दो घंटे का समय देकर पढ़ा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि ऐसे बच्चों को पढ़ाकर उन्हें शांति का अनुभव होता है। जिसके बाद उनकी परीक्षा की तैयारी कब आसान औ रुचिकर बन जाती है पता नहीं चलता। विद्यार्थियों ने बताया कि वह ब्लाक भुता के उच्च प्राथमिक विद्यालय से पढ़े हैं और इसी स्कूल के बच्चों को अब पढ़ा रहे हैं। इन छात्रों ने अपने अध्यापक अनुज शर्मा को प्रेरणा स्त्रोत मानते हुए जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाने का संकल्प लिया है।

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