बरेली, जेएनएन। आजाद हिंद फौज के संस्थापक सुभाषचंद्र बोस यानी नेताजी की विमान दुर्घटना में कथाकथित मौत.. आज भी बड़े रहस्यों में शुमार है। बरेली के कैलाशपुरम कॉलोनी के रहने वाले रणजीत पांचाल की नेताजी पर किताब 'भूमिगत सुभाष' में प्रामाणिक साक्ष्यों के साथ बताया कि जिस झूठे विमान हादसे में नेताजी की मौत बताई गई, उसके बाद वे काफी समय तक रूस में रहे। देश के नायक सुभाष चंद्र बोस की जयंती (23 जनवरी) पर नेता जी पर आधारित किताब के कुछ संस्मरण पर एक रिपोर्ट...।

किताब में रणजीत पांचाल लिखते है, नेताजी ने वर्ष 1928 में बंगाल वॉलंटियर्स का गठन किया था। कोलकाता के सत्यगुप्त को मेजर बनाया था। मेजर ने 24 अक्टूबर 1961 को बंगला के कूच बिहार जिला के शौलमारी आश्रम में नेताजी से मुलाकात का दावा किया। सत्यगुप्त ही नेताजी के जीवित होने का प्रचार प्रसार के लिए देश भ्रमण पर निकले। जिंदगी के आखिरी दिनों में वह अखिल भारतीय सुभाष वादी जनता संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और बरेली के रहने वाले डॉ. श्रीनिवास गाेयल के घर पर रहे थे। यहां सुभाषवादी गजेंद्र स्वरूप से उन्होंने कहा था कि कन्फ्यूज, मिस्ट्री और स्ट्रगल ही नेताजी के रास्ते रहे हैं।

किताब में लिखा है कि वर्ष 1956 में नेताजी के भाई ने शाहनवाज की जांच रिपोर्ट से इत्तफाक नहीं रखा। फिर इंदिरा सरकार के समय जस्टिस गोपाल दास खोंसला की एक सदस्यीय कमेटी ने 1970 में जांच की, बाद में 1974 को उन्होंने भी आधारहीन जांच रिपोर्ट दी। 1999 में जस्टिस मनोज कुमार मुखर्जी से जांच कराई। 2005 में आई रिपोर्ट में काफी हद तक साफ भी हुआ कि नेता जी की विमान दुर्घटना में मौत नहीं हुई।

सिविल लाइंस के कर्नल अमर बहादुर ने सिंगापुर में जवानों को दी थी ट्रेनिंग

बरेली के स्वतंत्रता सेनानी स्व. कर्नल अमर बहादुर सिंह सिंगापुर में आजाद हिंद ऑफिसर्स ट्रेनिंग स्कूल में जवानों को प्रशिक्षण देते थे। उनका घर सिविल लाइंस बरेली में है। इसके अतिरिक्त स्वतंत्रता सेनानी झम्मन लाल आजाद पहले ब्रिटिश फौज में नायक थे। बरेली में बिहारीपुर कसगरान में स्थित सुभाष वाटिका में नेताजी की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। 

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