बरेली, जेएनएन। Corona Sampling Investigation : बदायूं कोरोना संक्रमण से लोगों को निजात दिलाने के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों ने पूरी व्यवस्था का ही मजाक बना कर रखा था। वह थ्रोट स्वैब तोड़कर लैब को फर्जी सैंपल ही नहीं भेज रहे थे, साथ ही शासन को गुमराह करने के लिए फर्जी नाम और पते भी बनाते थे। इतना ही नहीं उन नाम और पतों के साथ मोबाइल नंबर भी दर्ज किए जाते थे। दैनिक जागरण ने फर्जी सैंपलिंग किए जाने का राजफाश किया तो मामले की जांच शुरू की गई। जांच में फर्जीवाड़ा करने वाली टीम की करतूत सामने आ रही हैं। इस मामले की गंभीरता से जांच की जाए तो इस टीम के पांच सदस्य के अलावा विभाग में तैनात कई कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है।

आगामी त्योहारों को देखते हुए दूसरे प्रदेशाें और जिलों से लोगों का आना शुरू हो गया है। वहीं कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए शासन ने कोरोना की जांच लगातार किए जाने पर जोर दे रखा है। जिले में भी इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। जिलाधिकारी और सीएमओ ने जिले के सभी सीएचसी पीएचसी में जांच जारी रखने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा शहर में शिविर लगाकर जांच कराई जा रही हैं।

दैनिक जागरण ने कोरोना जांच की हकीकत जानने को पड़ताल की तो जांच की हकीकत सामने आई। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी सैंपलिंग की संख्या बढ़ाने के लिए फर्जी सैंपल तैयार कर रहे थे। दैनिक जागरण ने 16 अक्टूबर के अंक में खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिस पर डीएम दीपा रंजन ने मामले की जांच शुरू कराई। शनिवार को जिला सर्विलांस अधिकारी डा. अनिल शर्मा ने इस टीम के सभी पांच सदस्यों को तलब किया था।

इसके बाद मामले की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि जिन फर्जी सैंपल को तैयार किया गया था, उन्हें ऐसे ही नहीं रखा गया, बल्कि जांच के लिए मेडिकल कालेज स्थित लैब भी भेजा गया था। इसके लिए बकायदा फर्जी नाम, पता और मोबाइल नंबर की सूची भी तैयार की गई थी। ऐसे सैंपल की लिस्ट बनाई जा रही है। यह तो तय है कि खुलेआम यह फर्जीवाड़ा करने वाली यह टीम अभी नहीं बल्कि कई महीनों से यह खेल कर रही थी। अब इनके द्वारा किए गए सभी सैंपलों की रिपोर्ट का मिलान किया जाएगा।

मेडिकल कालेज के प्राचार्य ने दी जानकारी

मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. धर्मेंद्र गुप्ता ने बताया कि सीएमओ की ओर से बनाई गई जो टीम सैंपल आरटीपीसीआर जांच के लिए भेजती है। उन सभी की जांच पूरी प्रक्रिया के तहत की जाती है। इसमें अगर किसी सैंपल में आरएनए नहीं निकलता है तो उसे निगेटिव मान लिया जाता है। बताया कि सभी सैंपल के पूल बनाने, आरएनए अलग करने समेत मशीन में रखने आदि की पूरी प्रक्रिया की जाती है। बता दें कि फर्जी सैंपलिंग के बाद मेडिकल कालेज के लैब कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे थे। इसके चलते ही मेडिकल कालेज के प्राचार्य से बात की गई तो उन्होंने पारदर्शिता का दावा किया

एंटीजन जांच में भी हो रहा खेल

आरटीपीसीआर का खेल सामने आने के बाद एंटीजन जांच पर भी सवाल उठे हैं। प्रतिदिन की स्थिति देखने पर आशंका जताई जा रही है कि एंटीजन जांच की रिपोर्ट भी फर्जी तैयार की जा रही है। जब आरटीपीसीआर की वीटीएम बनाने पर फर्जीवाड़ा हो सकता है तो एंटीजन में तो सिर्फ किट का उपयोग करना भर दिखाना होता है। ऐसे में एंटीजन किट से हुई सैंपलिंग की जांच की मांग की जा रही है।

फर्जी आरटीपीसीआर सैंपल तैयार किए जाने के मामले की जांच चल रही है। जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उन्हें संकलित किया जा रहा है। संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डा. अनिल शर्मा, जिला सर्विलांस अधिकारी

Edited By: Ravi Mishra