बरेली, जेएनएन : फतेहगंज पश्चिमी की बंद रबर फैक्ट्री में चल रहे ऑपरेशन टाइगर में भी कोरोना का कहर दिखने लगा है। दरअसल फैक्ट्री में घूम रही बाघिन को पकड़ने के लिए आयी डल्ब्यूटीआइ, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की पूरी टीम अपने साथ लगाए गए कैमरे आदि भी लेकर चली गयी हैं। अब इस आपरेशन को पूरा करने के लिए वन विभाग के अलावा केवल कानपुर वन्य जीव प्राणी उद्यान के चिकित्सक डा. आरके सिंह ही शेष हैं। बाघिन को पकड़ने के लिए अब चूना कोठी को चयनित किया गया है। इसमें वन विभाग बुधवार को दरवाजा लगवाने का काम कर रहा है।

डीएफओ भारत लाल ने बताया कि बुधवार को फतेहगंज पश्चिमी की बंद रबर फैक्ट्री में लगे नौ सेंसर कैमरों में बाघिन की किसी भी कैमरे में फोटो नहीं आयी है। इसके साथ ही जमीन की मिट्टी सूख जाने के कारण अब उसके पंजों के निशान केवल नमी वाले स्थान पर ही मिल रहे हैं। बुधवार को कां¨बग के दौरान उसका कोई मूवमेंट नहीं मालूम चल सका। अब उसे पकड़ने के लिए चूना कोठी में दरवाजे लगा उसमें एक बार फिर से पड्डा बांधकर जाल में फंसाया जाएगा। दरवाजे लगाने के लिए कारपेंटर लगा दिए गए हैं। मेन प्रवेश द्वार पर ऐसा दरवाजा लगाने की तैयारी है, जिसमें बाघिन के प्रवेश करते ही दरवाजा ऑटोमेटिक बंद हो जाएगा।

डीएफओ ने बताया कि डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम अभी चली गयी है। लेकिन फोन पर हुई वार्ता में तय हुआ है कि कमरे में बाघिन के आते ही पीलीभीत से टीम तुरंत रबर फैक्ट्री पहुंच जाएगी। बताया कि बाघिन को ट्रेंक्युलाइज करने के लिए डेन इंजेक्ट डार्ट गन विशेषज्ञ डा. आरके सिंह के अलावा पीलीभीत रिजर्व टाइगर से भी मंगा कर स्टैंड बाई में रख ली गई है। विशेषज्ञ डा. आरके सिंह, डीएफओ भारत लाल ने बाघिन द्वारा पिछली बार शिकार किए गए पड्डा के स्थान को ही इस बार भी चुना है।

 

Posted By: Ravi Mishra

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