बरेली, अंकित शुक्ला।  : गाय का दूध पौष्टिकता से भरपूर होने के साथ ही स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना गया है। गाय के दूध का सेवन करने से कई तरह की बीमारियां दूर होती हैं। यदि गाय का दूध कुपोषित बच्चों को नियमित दिया जाए तो इस बीमारी से जल्द ही राहत मिल जाती है। निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत कुपोषित बच्चों के स्वजनों को निश्शुल्क गाय देना है। कई माह बीत जाने के बाद भी यह योजना जनपद में परवान नहीं चढ़ रही है। जिले में वैसे तो कुल छह हजार अतिकुपोषित बच्चे, 35 से 40 हजार कुपोषित बच्चे हैं। यही नहीं जिले में संचालित 50 गोशालाओं में कुल 4517 गाय संरक्षित हैं।

निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत कुपोषित बच्चों के स्वजनों को निश्शुल्क गाय देना है। कई माह बीत जाने के बाद भी यह योजना जनपद में परवान नहीं चढ़ रही है। जिले में अभी तक केवल एक ही बच्चे के स्वजनों ने गाय ली, जिसे एक सप्ताह बाद वापस भी कर दिया। कुपोषित बच्चों की संख्या में बच्चों को तीन श्रेणी में रखा गया है। सभी बच्चों का कुपोषण दूर करने के लिए सरकार की ओर से विभिन्न योजनाएं शुरू की गई। बच्चों में कुपोषण को दूर करने के लिए शासन ने मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना चलाई है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति निराश्रित गाय को ले सकता है। सितंबर 2020 में शासन ने इस योजना का लाभ कुपोषित परिवारों को वरीयता के आधार पर देने का निर्णय लिया।

50 अतिकुपोषितों की दी गई थी सूची

जिला कार्यक्रम अधिकारी डा. आरबी सिंह ने बताया कि योजना के लिए 50 अतिकुपोषित परिवार की सूची सीवीओ को भेजी गई थी। जिसमें से एक भी परिवार ने गाय नहीं ली है। जबकि प्रत्येक परिवार को नौ सौ प्रतिमाह भी पशुपालन विभाग की ओर से दिया जाना है।

नहीं काम आया जागरूकता अभियान

सितंबर 2020 में शुरू योजना का लाभ कुपोषित परिवारों को वरीयता के आधार पर देने का निर्णय लिया। इस योजना को सफल बनाने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया गया। जिले में योजना के परवान न चढ़ने का एक कारण जिले में संचालित निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों में जो गाय है, वह बेहद कम दूध देने वाली है। इससे लाभार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। यही कारण हैं कि जिले में योजना फ्लाप हो रही है।

 निराश्रित गोवंश स्थलों में संरक्षित गाय कम दूध देने वाली हैं। ऐसे में लोग इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। सभी को कम से कम 10 लीटर प्रतिदिन दूध देने वाली गाय चाहिए। - डा. ललित कुमार वर्मा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी

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