जेएनएन, बरेली : पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट के नाम पर दिव्यांगों को शिविर लगाए बिना ही उपकरण बांटे जाने के धोखाधड़ी के मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका प्रभारी सेशन जज शकील अहमद ने खारिज कर दी।

विधि मंत्रालय से लिया था सात लाख का अनुदान 

पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी एवं पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट चलाती थीं। उन्होंने ट्रस्ट के नाम पर सामाजिक न्याय एवं विधि मंत्रालय से सात लाख रुपये का अनुदान प्राप्त किया था। भारत सरकार को दी रिपोर्ट में उन्होंने बताया था कि इस धनराशि का उपयोग वर्ष 2010 में शिविर लगाकर दिव्यांगों को निश्शुल्क उपकरण बांटने में किया गया।

प्रभारी सेशन जज ने खारिज की अग्रिम जमानत अर्जी 

जब इसकी जांच हुई तो आर्थिक अपराध शाखा ने राजफाश किया कि बिना शिविर लगाए ही धनराशि की हेराफेरी कर ली गई। इसकी रिपोर्ट आर्थिक अपराध शाखा के इंस्पेक्टर रामशंकर यादव ने थाना भोजीपुरा में 29 मई 2017 को दर्ज कराई थी। इसमें ट्रस्ट के सचिव अतहर फारुखी व डायरेक्टर लुईस खुर्शीद को नामजद किया गया था। इसके बाद आरोपित अतहर फारुखी व लुईस खुर्शीद ने 16 जुलाई को विशेष अदालत एमपी एमएलए में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी। इसे मंगलवार को प्रभारी सेशन जज शकील अहमद खान ने खारिज कर दिया। अब अंतरिम जमानत अर्जी पर चार अक्टूबर को सुनवाई होगी।  

Posted By: Abhishek Pandey

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