जेएनएन, शाहजहांपुर : आयुध वस्त्र निर्माणी की स्थापना हुई तो ब्रिटिश शासन में थी, लेकिन आजादी इसकी प्रगति और तेज हुई। 107 वर्ष से अधिक पुरानी इस निर्माणी ने पिछले 75 वर्षों में तमाम उपलब्धियां हासिल कीं। यहां के बने उत्पाद सुरक्षा बलों के लिए आज भी पहली पसंद बने हुए हैं। सरहद पर देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के लिए शस्त्र से लेकर वस्त्र तक का ध्यान आर्डनेंस फैक्ट्रियां रख रही हैं। आयुध वस्त्र निर्माणी में बनने वाले कंबल, कोट, जैकेट व कैप की मांग बनी हुई है। जिले में सिलाई की गुणवत्ता अच्छी होने व श्रम व संसाधन सस्ते होने के कारण 1914 में जिले में क्लोङ्क्षदग फैक्ट्री की शुरुआत हुई थी। 1927 में यह आर्डनेंस में विलय हो गई। 15 अक्टूबर 2021 को आयुध वस्त्र निर्माणी का निगमीकरण हो गया। इसको ट्रूप कम्फट््र्स लिमिटेड में शामिल किया गया।

हर मौके पर किया साबित

1914 के प्रथम विश्व युद्ध के समय यहां से सेना के लिए वस्त्र भेजे गए। 1918 में उत्पादन और ज्यादा बढ़ाया गया। 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान रात दिन काम हुआ। 1962 में चीन के भारत पर आक्रमण के दौरान सेना के लिए उत्पादन और बढ़ा। 1961-62 से लेकर 1963-64 तक कर्मचारियों ने सेना के लिए विभिन्न उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया।

ये बने सुरक्षाबलों की पंसद

इस फैक्ट्री में सेना के लिए विशेष डिजाइन की गई बाला कलावा कैप माइनस 10 डिग्री तापमान में भी हवा व ठंड से बचाती है। जबकि थ्री लेयर ईसीडब्ल्यूसीएस जैकेट माइनस 50 डिग्री तापमान में 40 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से ज्यादा हवा में भी कारगर है। टू लेयर ईसीसी जैकेट माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तापमान व 40 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से हवा सहन कर सकती है। सीआरपीफ के लिए जैकेट व सेना के लिए कैप बन रही हैं।

हर मौके पर किया साबित

निर्माणी ने हर मौके पर स्वयं को साबित किया है। यहां कोरोना काल में पीपीई किट, मास्क, सैनिटाइजर, फेस शील्ड, टेंट, डिस्पोजेबल बेड, डिस्पोजेबल ब्लैंकेट कवर बनाए गए। यहां के उत्पाद सेना व पैरामिलिट्री फोर्स को भेजे जा रहे हैं। यहां के चार उत्पादों को पेंटेंट भी मिल चुका है।

Edited By: Ravi Mishra